Wednesday, March 23, 2022

मगध का उदय( भारतीय इतिहास भाग 8)

                  🟠 मगध का उदय🟠
मगध महाजनपद अखंड भारत की परिकल्पना को सिद्ध करता है इतने कौशल वत्स तथा अवंती को पराजित कर एक नए मगध की नींव रखी! 
मगध में राजवंश का उदय-
मगध में तीन राजवंश थे परंतु पुराणों के अनुसार चार  राजवंश थे-
1. ब्रहद्रथ  2. हर्यक 3. शिशुनाग 4.नंद 

1.हर्यक  वंश-
इस वंश को मगध का वास्तविक वंश माना जाता है इसके संस्थापक हर्यक थे! 
इस वंश को पित्र हंता वंश कहा जाता है! 
✴️ बिंबिसार-
इस वर्ष का एक शासक बिंबिसार था जिसने अपनी राजधानी राजगृह या गिरीब्रज बनाई! 
जैन साहित्य में इसे श्रेणिक कहा गया! 
इतने विवाह नीति द्वारा राज्य का विस्तार किया! 
इसका पहला विवाह लिच्छवि की राजकुमारी चेलना के साथ हुआ जिससे पुत्र अजातशत्रु का जन्म हुआ! 
इसका दूसरा विवाह मोडरा (मंद्र) की राजकुमारी क्षेमा से हुआ! 
इसका तीसरा विवाह कौशल की राजकुमारी महाकौशला देवी से हुआ और दहेज में इसे काशी गांव मिला! 
Note- भारतीय इतिहास का पहला दहेज का उदाहरण बिंबिसार तथा महाकौशला देवी का विवाह है! 
😂 महावग्ग नामक ग्रंथ के अनुसार बिंबिसार की 500 रानियां थी! 
Important- बिंबिसार का राज वैद्य जीवक था जो अवंती नरेश चंडप्रघोत के पांडुरोग अर्थात पीलिया के इलाज के लिए गया था! 
बिंबिसार की हत्या उसके पुत्र अजातशत्रु ने की! 


✴️ अजातशत्रु-
इसे कुनिक या लिच्छिवी दौहित्र कहा जाता है! 
Important- वैशाली(लिच्छवी) विश्व का पहला गणतंत्र वाला राज्य था! 
इसी के समय में सप्तपर्णी गुफाएं में प्रथम बौद्ध संगीति हुई! 
इसकी हत्या इसके पुत्र उदायनी ने की! 

✴️ उदायनि-
पुराणों के अनुसार  किसने गंगा तथा सोन संगम में कुसुमपुर या पुष्पपुर की स्थापना की जिसे पाटलिपुत्र के नाम से जाना जाता है! 
इसने पाटलिपुत्र को अपनी राजधानी भी बनाया! 
इसने जैन धर्म को अपनाया था! परंतु अजातशत्रु बौद्ध धर्म का अनुयाई था! 
इस वंश का अंतिम शासक नाग दशक था जिसकी हत्या शिशुनाग ने की थी! 

2. शिशुनाग वंश-
इसका संस्थापक शिशुनाग था जिसने अपनी राजधानी वैशाली बनाई! 
✴️ कालाशोक-
इसने अपनी राजधानी पाटलिपुत्र बनाई! 
इसे पुराणों में काकवर्ण कहा गया
यह बौद्ध धर्म का अनुयाई था इसके समय में द्वितीय बौद्ध संगीति का आयोजन वैशाली में हुआ! 
इस वंश का अंतिम राजा नंदी वर्धन था! 

3. नंद वंश-
इस वंश को इतिहास का प्रथम अनार्य वंश या क्षत्रीय वंश कहते हैं! 
याद रखे- पुष्यमित्र शुंग को अनार्य कहते है! 
नंद वंश का संस्थापक महापदमनंद था
✴️महापदमनंद-
इसे भार्गव द्वितीय परशुराम एकराट  एकच्छत्र सर्वक्षत्राहंतक के नाम से भी जाना जाता है! 
✴️ घनानंद-
यह एक अत्याचारी राजा था  जो जैन धर्म को मानता था! 
इसे जेनोफोन की बुक में अग्रमीज कहा गया है! 
यह सिकंदर का समकालीन था इस वंश का अंतिम शासक भी यही था जिसे चाणक्य की  मदद से चंद्रगुप्त ने पराजित किया और मौर्य वंश की नींव रखी! 

महाजनपद का उदय 6 भाग

             ✴️महाजनपद का उदय✴️
गार्डन चाइल्ड ने अपनी पुस्तक अर्बन रेवोलुशन में महाजनपद काल को द्वितीय नगरी क्रांति कहा है इसका आधार लोगों को माना था! 
🟠 महाजनपदों की सूची का स्त्रोत-
1. बौद्ध ग्रंथ- अंगुत्तर निकाय और महावस्तु
2. जैन ग्रंथ- भगवती सूत्र
✴️सबसे अधिक शक्तिशाली जनपद- मगध कौशल वत्स अवंती
✴️16 महाजनपदों में से वज्जि व  मल्ल में गणतंत्र  बाकी में राजतंत्र था! 
✴️विश्व का सबसे प्राचीन नगर पाटलिपुत्र था! 
बौद्ध ग्रंथ महापरिनिर्वाणसूत्त के अनुसार प्राचीन ✴️भारत के 6 महानगर चंपा राजगृह श्रावस्ती कौशांबी काशी साकेत(अयोध्या) का वर्णन है! 

16 महाजनपद  का वर्णन-
1. काशी-
✴️ इसकी राजधानी वाराणसी थी! 
✴️ इसका प्रथम उल्लेख अथर्ववेद में मिलता है! 

2. कौशल-
इसकी राजधानी श्रावस्ती वर्तमान का फैजाबाद मंडल थी! 
महाकाव्य काल में कौशल की राजधानी अयोध्या दी! 

3. अंग-
इसकी राजधानी वर्तमान चम्पा अर्थात वर्तमान का भागलपुर (मुंगेर) थी! 

4. मगध- 
इसकी राजधानी राजगृह या गिरीब्रज अर्थात वर्तमान का दक्षिणी बिहार थी! 
यह महाजनपद काल का सबसे प्राचीन तथा सर्वाधिक शक्तिशाली महाजनपद था! 

5. चेदी- 
इसकी राजधानी सूक्तिमति अर्थात वर्तमान का बुंदेलखंड थी! 

6. वत्स-
इसकी राजधानी कौशांबी अर्थात वर्तमान का बांदा (इलाहाबाद) थी! 

7. असमक-
इसकी राजधानी पोतना या पोटली थी जो बाद में प्रतिष्ठान बनी! 
यह महाजनपद एकमात्र महाजनपद था जो गोदावरी नदी के तट पर था! 

8- गांधार-
इसकी राजधानी तक्षशिला थी अर्थात वर्तमान का रावलपिंडी पेशावर (पाकिस्तान) थी! 

9. मत्स्य-
इसकी राजधानी विराट नगर अर्थात वर्तमान का अलवर (भरतपुर "जयपुर") थी! 
मत्स्य की राजधानी विराटनगर में ही पांडव अज्ञातवास अर्थात प्रवास के दौरान रुके थे! 

10- कम्बोज-
इस महाजनपद की राजधानी राजपूर थी  अर्थात वर्तमान का चाहाटक (कश्मीर) थी! 
यह क्षेत्र घोड़ों के लिए प्रसिद्ध था! 

11. कुरु
इनकी राजधानी इंद्रप्रस्थ अर्थात वर्तमान का मेरठ ,दिल्ली  का क्षेत्र था! 
यहां का राजा कौरव्य था इसके पौत्र कौरव तथा पांडव थे! 

12. पांचाल-
इसकी दो राजधानी थी-
उत्तर पांचाल की राजधानी अहिच्छत्र अर्थात बरेली रामनगर वाला क्षेत्र.
दक्षिण पांचाल इसकी राजधानी काम्पिल्य अर्थात वर्तमान का फर्रुखाबाद थी! 

13. शूरसेन-
इसकी राजधानी मथुरा अर्थात ब्रजमंडल थी ! 
यही के राजा श्री कृष्ण थे! 

14. अवंती
इसकी भी दो राजधानियां थी-
उत्तर अवंती क्षेत्र की राजधानी उज्जैनी
दक्षिण अंतिकी की राजधानी महिष्मति

15. वज्जी-
इसकी राजधानी वैशाली अर्थात वर्तमान का बिहार थी! 
यह एक आठ राज्यों का संघ था! 

16. मल्ल
इसकी राजधानी कुशीनगर तथा पावा  अर्थात वर्तमान का गोरखपुर (देवरिया)  क्षेत्र था! 

✴️बुद्ध के समय 10 गणतंत्र थे!
1. कपिलवस्तु के शाक्य
2. सुमसुमारा के भग्ग
3. अलकप्प के बुली 
4. केसमुत्ति के कलाम 
5. रामग्राम के कोलिय
6. कुशीनारा के मल्ल 
7. पावा के मल्ल
8. पिप्पलिवन के मोरिय
9. वैशाली के लिच्छवि
10. मिथिला के विदेह

Monday, March 21, 2022

उत्तराखंड की विगत परीक्षा में आए सामान्य ज्ञान के प्रश्न-

✴️ उत्तराखंड की विगत परीक्षा में आए सामान्य ज्ञान के प्रश्न✴️
1- यंग इंडिया के संपादक कौन थे- महात्मा गांधी
Note- यह एक अंग्रेजी अखबार था जो 1919 मे निकला था जो 12 वर्षों तक चला! 
2- यूरोपीय संघ का मुख्यालय है- ब्रुसेल्स
Note- यूरोपीय संघ मुख्यालय बेल्जियम की राजधानी ब्रुसेल्स में है। 1993 में मास्ट्रिच संधि पर हस्ताक्षर के साथ यूरोपीय संघ अस्तित्व में आया। इसमें 27 देश है! 
3- शिक्षा परीक्षण एवं स्वास्थ्य पर किया गया वह क्या कहलाता है- मानव पूंजी
Note-मानव पूंजी एक अवधारणा है जिसका उपयोग अर्थशास्त्रियों और सामाजिक वैज्ञानिकों द्वारा उत्पादन प्रक्रिया में उपयोगी मानी जाने वाली व्यक्तिगत विशेषताओं को नामित करने के लिए किया जाता है। इसमें कुछ नाम रखने के लिए कर्मचारी ज्ञान, कौशल, जानकारी, अच्छा स्वास्थ्य और शिक्षा शामिल है। 
4- ईस्ट इंडिया कंपनी को दीवानी प्रदान की थी- शाह आलम द्वितीय
Note- मुगल सम्राट शाह आलम द्वितीय ने 1765 में ईस्ट इंडिया कंपनी को बंगाल, बिहार और उड़ीसा की दीवानी दी। बक्सर की लड़ाई अंग्रेजों और मीर कासिम, शुजा उद दौला जो अवध के नवाब थे और मुगल सम्राट शाह आलम द्वितीय की संयुक्त सेना के बीच लड़ी गई थी। यह लड़ाई अंग्रेजों ने जीती थी।
5- संविधान सभा की प्रथम बैठक कब हुई थी- 9 दिसंबर 1946 को
Note- संविधान सभा की पहली बैठक 9 दिसम्बर, 1946 को नई दिल्ली के कॉन्स्टिट्यूशन हॉल, जिसे अब संसद भवन के केंद्रीय कक्ष के नाम से जाना जाता है, में हुई। इसकी अध्यक्षता सच्चिदानंद सिन्हा ने कीl
5- 1932  में कोलकाता विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में बंगाल के गवर्नर पर किस क्रांतिकारी महिला ने गोली चलाई- बिना दास
Note- 6 फरवरी 1932 को कलकत्ता विश्वविद्यालय में समावर्तन उत्सव( दीक्षांत समारोह) मनाया जा रहा था। बंगाल के अंग्रेज लाट सर स्टैनले जैकसन मुख्य अतिथि थे। उस अवसर पर कुमारी वीणादास जो उपाधि लेने आई थी ने गवर्नर पर गोली चला दी।
6- वायु की गति मापने वाला यंत्र है- एनीमोमीटर
7- राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस कब मनाया जाता है- 24 अप्रैल
Note- भारत के तत्कालीन प्रधान मंत्री मनमोहन सिंह ने 24 अप्रैल 2010 को पहला राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस घोषित किया था। 
8- राज्य के नीति निर्देशक तत्व का उद्देश्य है-  लोक कल्याणकारी राज्य की स्थापना करना
Note- राज्य के नीति निर्देशक तत्व (directive principles of state policy) जनतांत्रिक संवैधानिक विकास के नवीनतम तत्व हैं। सबसे पहले ये आयरलैंड (Ireland) के संविधान मे लागू किये गये थे। ये वे तत्व है जो संविधान के विकास के साथ ही विकसित हुए है। इन तत्वों का कार्य एक जनकल्याणकारी राज्य (वेलफेयर स्टेट) की स्थापना करना है। इनका वर्णन भारतीय संविधान के चौथे भाग में 36 से 51 अनुच्छेद में किया गया! 
9- भारत में गरीबी का सर्वप्रथम अनुमान किया गया- बगीचा सिंह मीन्हास द्वारा
Note- भारतीय गरीबी के निर्धारण का आधार उद्योग में है
1971 में आजादी के बाद सबसे पहले दांडेकर रथ फार्मूले के आधार पर वैज्ञानिक तरीके से गरीबी का निर्धारण किया गयाl
1979 में अलघ समिति की रिपोर्ट के आधार पर ग्रामीण क्षेत्र में 2400 कैलोरी और शहरी क्षेत्रों में 2100 कैलोरी से कम उपयोग करने वाले व्यक्ति को गरीब माना जाता है! 
लकड़वाला समिति ने 1989 गरीबी का निर्धारण मूल्य स्तर के आधार पर किया! 
गरीबी के आंकड़े  राष्ट्रीय प्रतिदर्श सर्वेक्षण कार्यालय (एनएसएसओ) प्रदर्शित करता है ! 
10-तृतीय अंग्रेज मराठा युद्ध के दौरान गवर्नर जनरल कौन था- लॉर्ड हेस्टिंग्स
Note-  अंगेज़ों और मराठों के मध्य तीन आंग्ल-मराठा युद्ध हुए
✴️प्रथम युद्ध (1775 - 1782 ई.) में   हुए प्रमुख संधि-
सूरत की संधि 1775 रघुनाथ राव और अंग्रेजों के मध्य, 
पुरंदर की संधि 1776 तथा बड़गांव की संधि 1789 में हुई! 
सालबाई की संधि पुणे दरबार और अंग्रेजों के मध्य 1782 में हुई से ही युद्ध की समाप्ति हुई! 
 महत्वपूर्ण- इस युद्ध में कर्नल कीटिंग, कर्नल अप्टन, कर्नल एगटस तथा उसके बाद कर्नल काकबर्क ने अग्रेजों की अगुवाई की। इस समय काल में वारेन हेस्टिंग बंगाल का गवर्नर था।
✴️द्वितीय युद्ध (1803 - 1805 ई.)
✴️तृतीय युद्ध (1817 - 1819 ई.)-इस युद्ध में अंग्रेजों ने लार्ड मार्क्विस हेस्टिंग्स के नेतृत्व में युद्ध लड़ा और मराठों की तरफ से बाजीराव द्वितीय एवं अन्य मराठा सरदारों ने अगवाई की थी यह युद्ध “पूना की संधि” से समाप्त हुआ अंग्रेजों द्वारा पेशवा का पद समाप्त कर दिया गया।

11- सिमलीपाल जीव मंडल स्थित है- उड़ीसा
Note- उड़ीसा में चिलिका वन्यजीव अभयारण्य,कोटगढ़ वन्यजीव अभयारण्य,हदगढ़गढ़ वन्यजीव अभयारण्य,नंदनकानन जूलॉजिकल पार्क, सिमलीपाल राष्ट्रीय उद्यान प्रमुख है! 

12- राज्यसभा के राष्ट्रपति का चुनाव किस निर्वाचन मंडल के द्वारा होता है- संसद के समस्त सदस्य द्वारा
Note- भारत के संविधान का अनुच्छेद 63 यह उपबंध करता है कि भारत का एक उपराष्ट्रपति होगा। अनुच्छेद 64 और 89 यह उपबंध करते हैं कि भारत का उपराष्ट्रपति राज्य सभा का पदेन सभापति होगा और अन्य कोई लाभ का पद धारण नहीं करेगा।
13- भारत में श्वेत क्रांति के जनक माने जाते हैं- वी कोरियर
Note-श्वेत क्रान्ति को ऑपरेशन फ्लड के नाम से भी जाना जाता हैं। इसे 1970 में लांच किया गया  1 जुलाई 2001 से विश्व दुग्ध दिवस मनाया जाता है! 
14- भरतपुर के जाट राज्य की स्थापना की गई थी- सूरजमल और बदन सिंह द्वारा
Note- सूरजमल जाट राज्य का एक योग्य एवं विद्वान शासक था जिसके शासनकाल में जाट राज्य अपने चरणों उत्कर्ष पर था इसे जाटों का अफलातून भी कहा जाता हैl
15-भारत में वन नीति कब लागू हुई- 1952
 Note- भारत सरकार ने पहली राष्ट्रीय वन नीति 1952 में जारी की थी। परन्तु भारत में वन नीति की शुरुआत ब्रिटिश काल में 1894 में हो गयी थी। 1952 और 1988 में इसमें संशोधन किये गए।
16- बंदी प्रत्यक्षीकरण लेख जारी किया जाता है- व्यक्ति को न्यायालय के सामने प्रस्तुत करने के लिए
Note-सर्वोच्च न्यायालय को मूल अधिकारों के प्रवर्तन के लिए बंदी प्रत्यक्षीकरण, परमादेश, निषेध, उत्प्रेषण और अधिकार पृच्छा प्रादेश (रिट, writ) जारी करने का अधिकार दिया गया है, जबकि उच्च न्यायालयों को अनुच्छेद 226 - जो एक मैलिक अधिकार नहीं है - मूल अधिकारों का उल्लंघन न होने पर भी इन विशेषाधिकार प्रादेशों को जारी करने का  अधिकार है! 
17-मौसम की संबंधित दशाएं वायुमंडल की किस परत में होती है- क्षोभ मंडल
Note- क्षोभ मंडल- मौसम संबंधी परिवर्तन इसी मंडल में होते हैं इसलिए इसे परिवर्तन मंडल भी कहते हैं! 
समताप मंडल- ओजोन परत में पाए जाने वाले इस मंडल में ताप संबंधित घटनाएं होती है इसे ओजोन मंडल भी कहते हैं! 
18- विश्व व्यापार संगठन किस संगठन का उत्तराधिकारी है- जनरल एग्रीमेंट ऑन ट्रेड एंड ट्रेरिफ
Note- विश्व व्यापार संगठन की स्थापना वर्ष 1995 में हुई थी। यह एक अंतर-सरकारी संगठन है जो राष्ट्रों के बीच अंतर्राष्ट्रीय व्यापार के नियमन से संबंधित है। वर्तमान में, 164 देश इस संगठन के सदस्य हैं। WTO के वर्तमान महानिदेशक रॉबर्टो अज़ेवेडो और मुख्यालय जिनेवा, स्विट्जरलैंड में हैं।
19- बाबा परमाणु अनुसंधान केंद्र द्वारा विकसित बाबा कवच है- भारतीय सैनिक बलों हेतु बनाया गया अगली पीढ़ी के हल्के वजन की बुलेट प्रूफ जैकेट
Note- बाबा परमाणु अनुसंधान केंद्र की स्थापना 3 जनवरी 1954 को मुंबई में हुईl
20- पॉवर्टी एंड अनब्रिटिश रूल ऑफ इंडिया के लेखक हैं- दादा भाई नौरोजी
 Note- दादा भाई नौरोजी को भारत का ग्रैड ओल्ड मैन कहते हैं उन्होंने सबसे पहले राष्ट्रीय आय की गणना की थीl
21- भारत में काम के बदले अनाज कार्यक्रम शुरू किया गया- 1977-78
Note- काम के बदले अनाज पांचवी पंचवर्षीय योजना में अंत्योदय योजना(1977-78) के साथ शुरू की गईl
👉भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने एक नए "काम के बदले अनाज" कार्यक्रम की 14 नवंबर 2004 से शुरूआत की है. उन्होंने यह नया कार्यक्रम आंध्र प्रदेश में रंगा रेड्डी ज़िले के अलूर गाँव से शुरू की! 
22- डचों ने बंगाल में अपने पहले केंद्र की स्थापना की- चिनसुरा
Note- प्रथम डच गवर्नर: पीटर बोथ। भारत में उन्होंने 1605 में मुस्लीपट्टनम में पहला कारखाना स्थापित किया, उसके बाद 1610 में पुलिकट, 1616 में सूरत, 1641 में बिमिलीपट्टम और 1653 में चिनसुराह में स्थापित किया। चिनसुराह का कारखाना बिहार, बंगाल, उड़ीसा और बांग्लादेश में सभी डच एजेंसियों और कारखानों का मुख्यालय था।
23- हड़प्पा कालीन स्थल लोथल कौन से राज्य में है- गुजरात
Note- लोथल गुजरात के अहमदाबाद ज़िले में 'भोगावा नदी' के किनारे 'सरगवाला' नामक ग्राम के समीप स्थित है।खुदाई 1954-55 ई. में 'रंगनाथ राव' के नेतृत्व में की गई।
24- सीमांत गांधी के नाम से किसे जाना जाता है- खान अब्दुल गफ्फार खान
Note- ख़ान अब्दुल ग़फ़्फ़ार ख़ान सीमाप्रांत और बलूचिस्तान के एक महान राजनेता थे जिन्होंने भारत के स्वतंत्रता संग्राम में भाग लिया और अपने कार्य और निष्ठा के कारण "सरहदी गांधी", "बच्चा खाँ" तथा "बादशाह खान" के नाम से पुकारे जाने लगे।
25- संयुक्त राष्ट्र निशस्त्रीकरण आयोग की स्थापना की गई- 11 जनवरी 1952
26- किस अधिनियम के द्वारा वर्मा को भारत से पृथक किया गया- अधिनियम 1935
Note- 1935 के अधिनियम में केंद्र में द्वैध शासन (दोहरा शासन) की व्यवस्था लागू की गई थी।
27- भारत सरकार ने किसानों के लिए राष्ट्रीय नीति मंजूर की- 2007
28- स्वेज नहर दोनों सिरे पर स्थित पतन युग्म में है- पोर्ट सईद व तेंफिक
Note- स्वेज नहर भूमध्य सागर को लाल सागर से जोड़ती हैl 
29- नाबार्ड की  स्थापना- 12 जुलाई 1982
Note-NABARD का फुल फॉर्म National Bank For Agriculture and Rural Development या राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक है. इसका मुख्यालय (headquarter) मुंबई, महाराष्ट्र में है. नाबार्ड की स्थापना वर्ष 12 जुलाई 1982 में विकास सहायता' और 'गरीबी में कमी' लाने के लिए की गई थीl
30- भारत में वस्तु निर्यात के अंतर्गत सभी देशों को कितने भागों में विभाजित किया है- तीन भागो में
31- ओ.पी.ई.सी.का मुख्यालय- वियना
Note- 1960 से ही इस संगठन का मुख्यालय विएना में है जहाँ सदस्य देशों के तेल मंत्रियों की समय-समय पर बैठक हुआ करती है। 
32- गांधी जी द्वारा किए गए आंदोलन का सही क्रम है - चंपारण आंदोलन(1917) खेड़ा सत्याग्रह (1918) अहमदाबाद मिल मजदूर आंदोलन(1918) खिलाफत आंदोलन (1919) सविनय अवज्ञा आंदोलन (1930) भारत छोड़ो आंदोलन (1942) 

Saturday, March 19, 2022

वैदिक सभ्यता( भारतीय से भाग 4)

                    🌟 वैदिक सभ्यता 🌟
इस सभ्यता का समय काल 1500 ईसा पूर्व से 600 ईसा पूर्व तथा इसे दो भागों में बांटा जाता है! 
1- ऋग्वैदिक काल(1500-1000 ईसा पूर्व) 
2- उत्तर वैदिक काल(1000-600 ईसा पूर्व) 
Note- वैदिक सभ्यता की स्थापना का श्रेय आर्यो को जाता है  इस शब्द का अर्थ श्रेष्ठ उत्तम अभिजात कुलीन होता है! 
✴️1853 मैक्समूलर ने आर्य जाति को श्रेष्ठ जाति कहकर संबोधित किया उसने कहा कि यह मध्य एशिया से भारत आए थे! 
✴️ एक समान भाषा बोलने वालों को भी आर्य कहा जाता है तथा  इंडो-यूरोपियन भाषा बोलने वाले समूह को भी आर्य कहते हैं! 
🟠 मूल स्थान से संबंधित मत-
1- मध्य एशिया या बैक्टीरिया से संबंधित मत-जर्मन विद्वान मैक्स मूलर ने देखा कि इरानी ग्रंथ जेन्द अवेस्ता से इस सभ्यता की कई बातें मिलती है! अतः आर्य  मुल रूप से मध्य एशिया के निवासी थे यहां एक प्रमाणित मत है! 
2- उत्तर ध्रुव से संबंधित मत- बाल गंगाधर तिलक ने अपनी पुस्तक द ऑर्थोटिक होम आफ आर्यन मे आर्यों को उत्तरी ध्रुव का मूल निवासी माना है! 
3- तिब्बत संबंधित मत- दयानंद सरस्वती ने अपनी पुस्तक सत्यार्थ प्रकाश में इन्हें तिब्बत से संबंधित बताएं! 
4- सप्तसैंधव क्षेत्र- अविनाश चंद ने आर्यो को सप्तसिंधु क्षेत्र का बताया है! 
🟠आर्यो के जानकारी के साधन-
1- बोगजकोई अभिलेख- यह विश्व का सबसे प्राचीन अभिलेख है जो ईरान से प्राप्त हुआ इसे एशिया माइनर अभिलेख भी कहते हैं इसमें ऋग्वेद के देवता इंद्र वरुण मित्र नासत्य का वर्णन मिलता है! 
Note- भारत में सबसे प्राचीन अभिलेख अशोक के अभिलेख है! 
2- वेद-  वे शब्द विद धातु से बना है जिसका अर्थ होता है जानना या ज्ञान प्राप्त करना था इसके संकलनकर्ता महर्षि वेदव्यास जी थे इसकी उपनाम श्रुति ग्रंथ साहित्य ग्रंथ और अपौरुषेय ग्रंथ है! 
Note- श्रुति ग्रंथ- सुनकर एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक जान पहुंचाएं अर्थात गुरु शिष्य परंपरा
अपौरुषेय ग्रंथ- देवताओं द्वारा रचित ग्रंथ
महत्वपूर्ण- ऋग्वेद यजुर्वेद सामवेद को वेदत्रेयी कहा जाता है! 
वेदों के प्रकार- वे चार प्रकार के होते हैं! 
1- ऋग्वेद- 
सबसे प्राचीन वेद है! 
इसको पढ़ने वाले को होर्त या होता कहा जाता है! इसका उपवेद आयुर्वेद है!जिसके रचनाकार प्रजापति है! 
इसमें 10 मंडल 1028 सूक्त और 10462 मंत्र है! 
इसके ब्राह्मण ग्रंथ ऐतरैय व कोषीतकी  है!
इसमें पहला आठवां नौवां और दसवां मंडल बाद में जोड़ा गया! 
इसमें सबसे पवित्र नदी सरस्वती है! 
चौथे मंडल में कृषि का वर्णन है! 
तीसरे मंडल में गायत्री मंत्र है! 
दसवीं मंडल में चतुर्वर्ण व्यवस्था का उल्लेख है! 
इसमें नवे मंडल में सोम देवता का वर्णन है! 
इसमें साथ में मंडल में दसराज युद्ध का वर्णन है! 
असतो मा सद्गमय वाक्य भी इसी वेद से लिया गया

2- सामवेद-
भारत में संगीत का जनक किसी वेद को कहा जाता है! 
इसको पढ़ने वाले को उद्रगाता  कहा जाता है! 
इसका उपयोग गंधर्व वेद है जिसकी रचना महर्षि नारद ने की है! 
इसका ब्राह्मण ग्रंथ पंचवीस है जिसके रचनाकार जैमिनी है! 
इसमें मूल मंत्र 75 है! 
3- यजुर्वेद-
यजु का अर्थ होता है- यज्ञ से
इसमें गद्य तथा पद्य दोनों है अर्थात यह चम्पू शैली का वेद है! 
इसको पढ़ने वाले को अध्वर्यु कहा जाता है! 
किस वेद में हाथी पालन का वर्णन भी मिलता है! 
यह दो प्रकार का होता है-
1- कृष्ण यजुर्वेद- इसमें  गद्य तथा पद्य दोनों है! 
2- शुक्ल यजुर्वेद- इसमें केवल पद होते हैं इसे वाजसनेयी  संहिता भी कहते है! 
4- अथर्ववेद-
यह वेद अथर्व ऋषि द्वारा रचित है! 
इस वेद में औषधियों वशीकरण जादू टोना आदि का वर्णन है
इसका उपवेद शिल्प वेद है जिस के रचनाकार विश्वामित्र है! 
इसका ब्राह्मण ग्रंथ गोपथ है! 
इसमें  काशी का वर्णन तथा मगध महामारी फैलने का वर्णन  भी किया गया! 
🟠 पुराण- पुराणों की संख्या 18 इनके संकलनकर्ता लोमहर्ष तथा उसके पुत्र उग्रश्रवा है सबसे प्राचीन तथा प्रमाणित पुराण मत्स्य पुराण है
🟠 आरण्यक ग्रंथ- 
वनों में रचे गए यह ग्रंथ है जो वानप्रस्थ आश्रम के ऋषि द्वारा लिखे जाते हैं! 
इनका उद्देश्य है ईश्वर की उपासना में बोल देना! 
इनकी संख्या 7 है- ऐतरेय तैत्तिरीय माध्यन्दिन शंखायन  मैत्रायणी मलवकार वृहदारण्यक ! 
🟠 उपनिषद-
गुरु के समीप निष्ठा पूर्वक बैठना उपनिषद का अर्थ होता है! 
यह दार्शनिक विचारधारा के ग्रंथ है! 
इनकी संख्या 108 है इसमें 11 वह13 प्रमुख है! 
दारा शिकोह ने उपनिषदों का फारसी अनुवाद किया था! 
शंकराचार्य ने उपनिषदों में भारतीय की रचना की जिसे वेदांत दर्शन कहा जाता है! इनकी संख्या 6 है शिक्षा ज्योतिष कल्प व्याकरण निरुक्त छंद! 
सत्यमेव जयते मुंडकोपनिषद से लिया गया! 
        ऋग्वेदिक सभ्यता(1500-1000 ईसा पूर्व) 
🟠भौगोलिक विस्तार- यह सप्त सैंधव क्षेत्र में फैली था! अर्थात  7 नदियों से घिरा क्षेत्र यह नदियां सिंधु सरस्वती सतलाज व्यास रावी झेलम चिनाब थी! 
🟠 राजनीतिक जीवन- आर्यो  को पंच जन कहते थे क्योंकि इनके 5 कबीले होते थे- पुरू अनु द्रुहू  तुर्वस यदु थे! 
महत्वपूर्ण प्रशासनिक शब्द-
राजन या गोप- राष्ट्री का मालिक
पुरोहित- जन का मालिक
विशापति- विश का मालिक
ग्रामीणी- गांव या ग्राम का मालिक
कुलुप- कुल का मालिक
Note- ऋग्वैदिक काल में कुल सबसे छोटी इकाई थी
सभा और समिति दोनों ऋग्वैदिक काल की जनतांत्रिक संस्थाएं मानी जाती है! 
महत्वपूर्ण-
विदथ सबसे प्राचीन संस्था थी, इसका ऋग्वेद में 122 बार उल्लेख हुआ है जबकि समिति का 9 बार और सभा का 8 बार उल्लेख हुआ है। सभा वृद्ध जनों एवं कुलीन लोगों की संस्था थी। समिति कबीले की आम सभा होती थी।  जिसका राजा पर पूर्ण नियंत्रण होता था स्त्रियां सभा और समिति में भाग लेती थी !विदथ के संगठन और कार्यों के बारे में स्पष्ट उल्लेख नहीं है।
बली एक प्रकार का कर था जो जनता स्वेच्छा से राजा को देती थी! 
ऋग्वेद के सातव मंडल में दसराज युद्ध का वर्णन किया गया है जो परुष्णी अर्थात रावी नदी के तट पर भरत जन तथा 10 अन्य जनों के बीच हुआ था इसमें भरत जन के प्रमुख सूदास की विजय हुई! 
🟠 आर्थिक स्थिति- 
यह सभ्यता एक कृषि प्रधान ग्रामीण अर्थव्यवस्था वाली सभ्यता थी जिसका प्रमुख व्यवसाय पशुपालन था! 
गाय को अघग्या कहा जाता था! और सबसे उपयोगी पशु घोड़ा था! 
इस काल में लोहे का प्रचलन नहीं था और सर्वप्रथम ताबे का प्रयोग किया था! 
✴️ आर्थिक स्थिति से जुड़ी शब्दावली-
त्वष्ठा या तक्षण- बढ़ई
कमरि- धातुकार
यव- जौ
उर्दर- अनाज मापने वाला एक पात्र
हिरण्य- सोना
अयस- तांबा
🟠 सामाजिक स्थिति-
ऋग्वेद के दसवें मंडल में पुरुष सूक्त चार वर्णों की उत्पत्ति का उल्लेख है परंतु यह अस्तित्व में उत्तर वैदिक काल में आए! 
ऋग्वैदिक काल पितृसत्तात्मक था परंतु स्त्रियों की स्थिति काफी अच्छी थी! परिवार के मुखिया को कुलक(पिता) कहा जाता था
इस समय बाल विवाह सती प्रथा दहेज प्रथा पर्दा प्रथा का प्रचलन नहीं था! 
सोम रस प्रमुख पेय पदार्थ था! 
समाज में विधवा विवाह  दास प्रथा नियोग प्रथा का प्रचलन था! 
Note- जब किसी स्त्री के बच्चे नहीं होते या उसके पति की अकाल मृत्यु हो जाती है तो वह अपने देवर या संबंधी द्वारा गर्भ धारण करती है इसे ही नियोग प्रथा कहते हैं! 
इस काल की प्रमुख स्त्रियां लोपमुद्रा घोषा अपाला  विश्ववरा थी! 
 Note- जीवन भर अविवाहित स्त्री को अमाजु कहा जाता था! 

🟠 धार्मिक स्थिति-
आर्यों ने प्राकृतिक शक्तियों का दैव्यकरण किया! 
यासक ने देवताओं को तीन भागों में बांटा-
1- आकाशवासी देवता-
धौ/धौस- सबसे प्राचीन देवता इन्हें सर्जन का देवता कहा जाता था 
इनकी तुलना यूनानी देवता ज्यूस के सामान की जाती है! 
सूर्य- उगता हुआ सूरज इन्हें तेज का देवता कहा जाता है! 
वरुण- इसे ऋत का संरक्षक या ऋतस्यगोप को कहा जाता है इनका ऋग्वेद में सातवें मंडल मे 30 बार उल्लेख है इन्हें देवताओं का देवता कहा जाता है! समुद्र का देवता, विश्व के नियामक और शासक सत्य का प्रतीक, आकाश, पृथ्वी एवं सूर्य का निर्माता के रूप में जाना जाता है। 
Note- ऋतस्यगोप का मतलब होता है ऋतु परिवर्तन एवं दिन रात का कर्ताधर्ता! 
उषा- इन्हें उत्थान की देवी या प्रगति की देवी कहा जाता है! 
सविता(सावीत्री)- इन्हें अमृत की देवी कहा जाता है ऋग्वेद का तीसरा मंडल में वर्णित गायत्री मंत्र इन्हीं को समर्पित है! 
षूषन- पशुओं के देवता थे जो उत्तर वैदिक काल में शूद्रों के प्रमुख देवता बन गए! 
अश्वनी- चिकित्सा के देवता
विष्णु- विश्व का संरक्षक

2.अंतरिक्ष के देवता-
इंद्र- इन्हें युद्ध का देवता कहा जाता था यह आर्यों के प्रमुख देवता थे जिनके लिए ऋग्वेद में 250 सूक्त है! 
मरुत- इन्हें तूफान का देवता कहा जाता है! 
पर्जन्य (बादल)- इन्हें वर्षा का देवता कहा जाता है! 

3. पृथ्वी के देवता-
पृथ्वी- सर्जन की देवी
अग्नि- इन्हें अतिथि देवता या आर्यों का पुरोहित कहा जाता है इनके लिए ऋग्वेद में 200 श्लोक है! 
सोम- इन्हें वनस्पति का देवता कहते हैं इनका वर्णन ऋग्वेद के नवे मंडल में है इनके लिए 120 श्लोक है!
बृहस्पति- यज्ञ के देवता

      उत्तर वैदिक काल (1000-600 ईसा पूर्व) 

✴️ इस काल को ब्राह्मण धर्म काल भी कहते हैं! 
✴️ लोहे की खोज होने के कारण इसे लोगों प्रौद्योगिकी युग भी कहा जाता है! 
✴️ इस काल में सर्वप्रथम चित्रित मृदभांड मिले हैं! 
✴️ इस काल का केंद्र गंगा यमुना का दोआक था जो कुरुक्षेत्र तक था! 

राजनीतिक स्थिति-
इस काल में राजा के दैवीय उत्पत्ति का सिद्धांत अस्तित्व में आया जिसका पहला वर्णन ऐतरेय ब्राह्मण में मिलता है! 
राजा का  वंशानुगत  हो गया था जिसे सम्राट या एकराट कहा जाता था! 
बली एक अनिवार्य कर हो गया था जो ऊपर का 1/16वा भाग  हो गया था! 
Important- प्राचीन धर्म ग्रंथों के अनुसार कर की दर 1/6 भाग थीl
विजयनगर राजवंश प्राचीन धर्म ग्रंथों मे वर्णित  कर की दर पर आधारित कर वसूल करता था! 

🟠प्रमुख अधिकारी-
रत्नी- राज्य के उच्च अधिकारी को रत्नी कहते हैं जिसका वर्णन  शतपथ ब्राह्मण में 12 बार आया है! 
सूत- सारथी
भागदूध- कर संघकर्ता
महिषी- प्रमुख रानी
पालागत- विद्वान
श्रमण- वेद विरोधी अध्यापक

🟠आर्थिक स्थिति-
इस काल का मुख्य व्यवसाय कृषि था! 
अतरंजीखेड़ा (यूपी) से कृषि के लोहे के यंत्र मिले हैं जो लोहे का प्रथम प्रमाण है! 
इस काल में मुद्रा का प्रचलन हो गया था निष्क जो ऋग्वैदिक काल में स्वर्ण आभूषण था! यह उत्तर वैदिक काल मैं प्रमुख मुद्रा बन गई थी! 
इस काल में उर्फ(उन) और शज(सन) का उल्लेख मिलता है! 
🟠 धार्मिक स्थिति-
इस काल में कर्मकांड ओं का उदय हुआ! 
सर्वप्रथम शतपथ ब्राह्मण ग्रंथ में पुर्वजन्म व मृत्यु का उल्लेख है जबकि मोक्ष का वर्णन उपनिषदों  मे मिलता है! 
इस काल के प्रमुख देवता-
प्रजापति- सर्वोच्च देवता तथा सर्जन के देवता
रुद्र- पशु का देवता
विष्णु- विश्व का संरक्षक
पूषक- यह शूद्रों के देवता थे! 

🟠 सामाजिक स्थिति-
चार वर्णो का उदय हुआ- ब्राह्मण क्षेत्रीय शूद्र वैश्य
इस काल में स्त्रियों की स्थिति मैं गिरावट आई इस काल की प्रमुख स्त्रियां- गार्गी गंधर्व गृहिता मैत्रीय वेदवती थी! 
जाबालोपनिषद में चार आश्रमों का उल्लेख है! 
✴️इस काल में त्रिऋण का उल्लेख है-
1.पितृ ऋण- संतान उत्पन्न करने से
2. ऋषि ऋण- वेदों के अध्ययन से
3. देव ऋण- यज्ञ करने से

🟠 विवाह के 8 प्रकार-
1- ब्रह्मा विवाह- योग्य वर के साथ विवाह
2- देव विवाह- पुरोहित के साथ विवाह
3- आर्ष विवाह- दो गायों के बराबर धन देकर किया जाने वाला विवाह! 
4- प्रजापत्य विवाह- पिता द्वारा कन्या का हाथ माग कर के किया गया विवाह
Note- ब्रह्मा विवाह देव विवाह आर्ष विवाह प्रजापत्य विवाह इन विवाह को प्रसन्न विवाह कहते है! 
5- असुर विवाह- धन के बदले किया जाने वाला विवाह
6- गंधर्व विवाह- प्रेम विवाह
7- पैचास विवाह- बलात्कार करके किया जाने वाला विवाह
8- राक्षस विवाह- बलपूर्वक किया जाने वाला विवाह

🟠 प्रमुख यज्ञ-
अश्वमेघ यज्ञ- राजा द्वारा साम्राज्य विस्तार के लिए घोड़ा छोड़ दिया जाता है! 
Note- अंतिम अश्वमेघ यज्ञ सवाई जयसिंह ने कराया था! 
राजसुय यज्ञ- राज अभिषेक के दौरान किया गया यज्ञ! 
वाजपेई यज्ञ- शक्ति प्रदर्शन के लिए रथ दौड
अग्निष्टोम यज्ञ- पापों से मुक्त से संबंधित यज्ञ
सौत्रामंणि यज्ञ- पशु बलि
पुरुषमेध यज्ञ- राजनीतिक वर्चस्व के लिए विद्वान पुरुष की बलि दी जाती थी! 

🟠षड्दर्शन- 
1. लोकायत दर्शन- इसके लेखक चार्वाक है! 
2. योग दर्शन- पतंजलि
3. साख्य दर्शन- कपिल
4. न्याय दर्शन- गौतम
5. उत्तर मीमांसा- बादरायण
6. पूर्व मीमांसा- जैमिनी



प्रागैतिहासिक काल (भारतीय इतिहास भाग-1)

                   ✴️ प्रागैतिहासिक काल ✴️
प्रागैतिहासिक काल  ऐसा काल जिसका कोई लिखित साक्ष्य नहीं मिला
✴️ इस काल की खोज का श्रेय रॉबर्ट ब्रूस फुट को जाता है 30 मई 1863 चिंगलपुट जिला मद्रास के पल्लवरम में लैटेराइट मृदा से निर्मित हस्त कुठार की खोज की! 
नोट- रॉबर्ट ब्रूस फुट को प्रागैतिहासिक काल का पिता कहा जाता है! 
🟠प्रागैतिहासिक काल को तीन भागों में बांटा गया-
1- पुरापाषाण काल
2- मध्य पाषाण काल
3- नवपाषाण काल
1-पुरापाषाण काल- इस काल में मनुष्य शिकार कर अपना जीवन यापन करता था इस कारण इसे आखेटक युग भी कहा जाता है इसके अध्ययन को तीन भागों में बांटा गया-
1- निम्न पुरापाषाण काल
2- मध्य पूरापाषाण काल
3- उच्च पुरापाषाण काल
✴️ निम्न पुरापाषाण काल-
👉 अग्नि का ज्ञान
👉 मानव ने सर्वप्रथम क्वार्टजाइट पत्थर का प्रयोग किया
नोट- उपकरणों के आधार पर निम्न पुरापाषाण काल को दो भागों में बांटा गया है-
1-चौपर या चापिंग पेबुल संस्कृति- इस संस्कृति का साक्ष्य पंजाब कि सोहन नदी घाटी से मिला है! 
2- हैण्ड एक्स संस्कृति- 30 मई 1863 में रॉबर्ट ब्रूस फुट ने पल्लवरम में हैंड एक्स की खोज की थी! 
Imp- 1982 अरुणसोनकिया ने हथनोरा (नर्मदा नदी के मध्य का स्थान) होशंगाबाद(mp) में मानव कपाल खोजा गया जो मानव अस्थि का पहला साक्ष्य है! 
✴️ मध्य पुरापाषाण काल- 
👉इस समय जैस्पर,चर्ट,फिलेट का प्रयोग किया गया! 
Imp- फलकों की अधिकता के कारण इस काल को एचडी संकालिया ने फलक संस्कृति की संज्ञा दी हैl
✴️ उच्च पुरापाषाण काल-
👉इस काल में धार धार हत्यारों का प्रयोग होने लगा था! 
👉आधुनिक मानव (होमोसेपियंस) का उद्गम हुआ! 
महत्वपूर्ण तथ्य-
👉 पुरापाषाण काल को खाद्य संग्रहक काल भी कहा जाता है! 
👉 यूपी के लोहदानाला नामक स्थान की बेलन घाटी  से विश्व की सबसे प्राचीन अस्थि निर्मित स्त्री की मूर्ति प्राप्त हुई है अर्थात मातृ देवी की मूर्ति प्राप्त हुई है! 
👉 भीमबेटका की गुफा (मध्य प्रदेश) से मानव की चित्रकारी का प्रथम प्रमाण मिला है इसे मानव द्वारा निर्मित पहला घर भी कहा जाता है! 

2. मध्य पाषाण काल-
इस काल में औजार छोटे छोटे पत्थरों के बने होते थे इसलिए इस काल को माइक्रोलॉपिक या  सूक्ष्मपाषाण काल कहते हैं! 
सर्वप्रथम 1857 में सी.एल. कार्लाइल ने विन्ध्यक्षेत्र से इस काल में पशुपालन के सर्वप्रथम संकेत मिले! 
मध्यपाषाण काल के प्रमुख स्थल-
✴️बागौर (भीलवाड़ा जिला राजस्थान)- 1970 में बीएन मिश्रा ने इस स्थल को कोठारी तट पर खोजा जो मध्यपाषाण काल का सबसे बड़ा स्थल है! 
 Note- बहुत से स्त्रोतों से पता चलता है कि यहां से पशुपालन के साक्ष्य मिले जो प्रथम साक्ष्य हैं! 
✴️ सराय नहर राय (उत्तरप्रदेश)- इस स्थल से युद्ध में हत्या के साक्ष्य मिले हैं और एक कब्र से तीन कंकाल मिले हैं जिसके सर में पत्थर से चोट लगी है! 
✴️महदहा- यह स्थान उत्तर प्रदेश में है यहां से स्त्री पुरुष के एक साथ दफनाने के साक्ष्य मिले हैं! 
✴️ आजमगढ़ (होशंगाबाद जिला मध्य प्रदेश)- यहां से पशुपालन के  प्रथम साक्ष्य मिले हैं! 
✴️लंघनाज- गुजरात के इस स्थान से 14 कंकाल प्राप्त हुए हैं! 

3. नवपाषाण काल-
इस काल से पाहिए और  तिथि के साक्ष्य मिले हैं! 
इस काल का प्रथम वर्णन जॉन लूबाक की पुस्तक  प्रीहिस्टोरिक में मिलता है!
इस काल का प्रथम साक्ष्य 1842 में डॉक्टर प्राइमरोज द्वारा लिंगसूगूर (कर्नाटक) से प्रथम पोलिसदार कुल्हाड़ी खोजी ! 
इस युग के प्रमुख स्थल-
✴️मेहरगढ़- यह स्थान पाकिस्तान के बलूचिस्तान में है जहां से कृषि के प्रथम साक्ष्य मिले! 
✴️बर्जहोम- यह स्थान कश्मीर में है जहां से मालिक के साथ कुत्ते को दफनाने की साक्ष्य मिले है! 
Note- मानव का पहला पालतू पशु कुत्ता था! 
सिंधु स्थल रोपड़ पंजाब से भी कुत्ते के साथ मनुष्य दफनाने के साक्ष्य मिले! 
✴️गुफकराल- यह स्थल कश्मीर में है जहां से सिलबट्टा मिला! 
✴️कोल्डिहवा- यह स्थल बेलन नदी के तट पर इलाहाबाद में है!  यहां से चावल के प्राचीनतम साक्ष्य मिले जो 6500 ई.पु. के है! 
✴️चिरांद- यह स्थान बिहार में स्थित है यहां से सबसे अधिक हड्डियों के उपकरणो की प्राप्ति हुई है! 
✴️चोपानी मांडो- यह स्थान उत्तर प्रदेश में है जहां से विश्व के सबसे प्राचीन हस्त निर्मित मृदभांडो के साक्ष्य मिले है!  




Saturday, February 19, 2022

उत्तराखंड जिला दर्शन

                  उत्तराखंड जिला दर्शन
उत्तराखंड में 13 जिले और 2 मंडल है! कुमाऊं मंडल में 6 जिले और गढ़वाल मंडल में 7 जिले हैं! 
कुमाऊं मंडल- 1815 में कुमाऊं को नॉन रेगुलेटिंग जिला बनाया गया! 1829 में  कुमाऊं कमिश्नरी का सर्जन हुआ! 1854 मे  इसका मुख्यालय अल्मोड़ा से नैनीताल बनाया गया!  कुमाऊं मंडल  में 6 जिले आते है:- अल्मोड़ा, नैनीताल, पिथौरागढ़, बागेश्वर, उधमसिंह नगर, चंपावत
गढ़वाल मंडल- गढ़वाल मंडल की स्थापना दिसंबर  1968 में हुई परंतु उसने अपना कार्य जनवरी 1969 से प्रारंभ किया  आरंभ में इसमें चार जनपद थे! वर्तमान में इसमें सात जनपद है:-देहरादून,पौड़ी,हरिद्वार,चमोली,टिहरी,उत्तरकाशी,रुद्रप्रयाग
उत्तराखंड के जनपदों का गठन-
अल्मोड़ा- 1891 
नैनीताल- 1891
पौड़ी गढ़वाल- 1839
टिहरी- 1 अगस्त 1949
पिथौरागढ़- 24 फरवरी 1960 
चमोली- 24 फरवरी 1960
उत्तरकाशी- 24 फरवरी 1960 ई
देहरादून-  1817
Imp- देहरादून जनपद की स्थापना 1817 में हुई परंतु 1975 में देहरादून को उत्तराखंड स्थित गढ़वाल मंडल में स्थानांतरित कर दिया गया तथा 1975 से यह गढ़वाल मंडल में स्थित है 1817 में यह जिला बनकर मेरठ मंडल में शामिल था! 
हरिद्वार- 28 दिसंबर 1988
उधम सिंह नगर- 29 सितंबर 1995
Note- बहुत स्त्रोतों में 26 दिसंबर 1995 दिया! 
चंपावत- 15 सितंबर 1997
बागेश्वर- 15 सितंबर 1997
नोट- बहुत से स्त्रोतों में बागेश्वर की स्थापना 18 सितंबर 1997 दि है! 
रुद्रप्रयाग- 16 सितंबर 1997
नोट- बहुत से स्त्रोतों में रुद्रप्रयाग की स्थापना 18 सितंबर 1997 दिया है! 

               ✴️ कुमाऊ के जनपद✴️
कुमाऊं में उत्तराखंड के 6 जनपद आते है! जिनका का विवरण निम्नलखित है! 
                ✴️ अल्मोड़ा जनपद✴️

अल्मोड़ा जनपद 1891 पर में अस्तित्व में आया इसका मुख्यालय 1892 में  अल्मोड़ा को बनाया गया! 
अल्मोड़ा नगर खसिया खोलें डांडे के ऊपर बताया गया है! 
 Note- मानस खंड के अल्मोड़ा जनपद की स्थापना 13 अक्टूबर 1892 को भी हुईl
किल्मोड़ा घास  अधिकता के कारण इसका नाम अल्मोड़ा पड़ा! 
अल्मोड़ा जनपद नैनीताल बागेश्वर चंपावत पौड़ी गढ़वाल पिथौरागढ़ चमोली से सीमा बनाता है! 
अल्मोड़ा शहर की स्थापना 1530 एचडी में राजा भी पसंद की थी जो चंद्रवंशी का 43 वा राजा था इसे राजधानी 1563  में कल्याण चंद ने बनाई थी! 
अल्मोड़ा का क्षेत्रफल 3139 वर्ग किलोमीटर हैl
अल्मोड़ा का लिंगानुपात 1139 है यह राज्य का सर्वाधिक लिंगानुपात वाला जिला है! 
अल्मोड़ा का जनसंख्या घनत्व 198 हैl
अल्मोड़ा का शिक्षा लिंगानुपात 922 है यह राज्य का सबसे अधिक लिंगानुपात वाला जिला है! 
अल्मोड़ा की दशकीय वृद्धि दर -1.28% है! 
अल्मोड़ा के उपनाम बाल मिठाई का घर, संस्कृतिक नगरी, ताम्र नगरी, पटाल नगरी है! 
अल्मोड़ा के प्राचीन नाम रामक्षेत्र,आलमनगर खगमरकोट,राजापुर है! 
अल्मोड़ा की साक्षरता 80.47% है! 
अल्मोड़ा में 11 विकासखंड 12 तहसील 6 विधानसभा क्षेत्र है! 
अल्मोड़ा में 1817 में रैमजे कॉलेज छावनी कचहरी नॉर्मल स्कूल की स्थापना हुई! 
अल्मोड़ा नगर पालिका परिषद की स्थापना 1864 में हुई! 
उत्तराखंड की प्रथम जेल 1816 अल्मोड़ा में बनाई गई! 
उत्तराखंड की पहली मस्जिद की स्थापना अल्मोड़ा में ही हुई! 
अल्मोड़ा का वर्णन महात्मा गांधी की पुस्तक मेरी कुमाऊं यात्रा तथा विवेकानंद जी की पुस्तक कोलंबो से अल्मोड़ा में भी मिलता है! 
अल्मोड़ा मिशन स्कूल की स्थापना 1844 में तथा अल्मोड़ा टाउन स्कूल की स्थापना 1907 में हुई! 
सोबान सिंह जीना केंपस अर्थात अल्मोड़ा कॉलेज पहले आगरा विश्वविद्यालय से संबंधित डिग्री कॉलेज था 1973 में कुमाऊं विश्वविद्यालय की स्थापना के साथ  यह कुमाऊ का महाविद्यालय बन गया 1994 में इसे कैंपस का दर्जा प्राप्त हुआ! 
6 सितंबर 2016 को उत्तराखंड आवासीय विश्वविद्यालय अल्मोड़ा में खोला गया! 
1871 में यहां से अल्मोड़ा अखबार का प्रकाशन हुआ जो साप्ताहिक अखबार था जिसके संपादक बुद्धि बल्लभ पंत जी थे! 
✴️अल्मोड़ा जनपद के प्रमुख दार्शनिक स्थल✴️
 वीरणेश्वर मंदिर-
भगवान शिव के इस मंदिर का निर्माण राजा कल्याण चंद ने कराया था जो चंद वंश  44 नंबर का राजा था! 
यह मंदिर बिनसर पहाड़ी पर झंडीधार नामक स्थान पर स्थित है! 
विभाण्डेश्वर मंदिर-
इसे द्वाराहाट मंदिर भी कहते हैं! 
इस मंदिर को उत्तर के काशी के नाम से भी जाना जाता है! 
यह मंदिर सुरभि तथा नंदिनी नदी के तट पर है! 
यहां विषुवत संक्रांति के समय स्याल्दे विखौती मेला लगता है
1943 में महात्मा लक्ष्मी नारायण दास ने इस मंदिर का जीर्णोद्धार कराया था! 
यहां मंदिर नागार्जुन या नागार्धर पर्वत पर है! 

गणनाथ मंदिर-
इस मंदिर का निर्माण श्री वल्लभ जी महामहोपाध्याय किसी के पास इन्होंने उदय नौला भी बनाया! 
यह भगवान शिव को समर्पित मंदिर है जहां प्रकृति रूप से जल  टपकता रहता है
गणनाथ की चोटी पर मलिका देवी मंदिर भी स्थित है! 

चितई मंदिर-
कुमाऊं में न्याय के देवता या  कुमाऊ का परमोच्च न्यायालय के रूप से पूजा जाता है!
इन को पशु का रक्षक देवता  के रूप में भी पूजा जाता है! 
गोलू देवता के मंदिर चंपावत घोड़ाखाल पौड़ी और ताड़ीखेत में स्थित है! 

नंदादेवी मंदिर-
इसे कोटभ्रामरी  देवी का मंदिर भी कहते हैं! 
नंदा देवी की स्वर्ण प्रतिमा ज्ञान चंद्र तथा साधरण प्रतिमा बाज बहादुर चंद्र लाया था! 
कमिश्नर ट्रेल ने नंदा देवी की मूर्ति को पर्वतेश्वर मंदिर में रखा तब से इसे नंदा देवी के रूप में पूजा जाता है! 
भाद्रपद की अष्टमी को यहां विशाल मेला लगता है! 

जागेश्वर मंदिर समूह-
अल्मोड़ा का सबसे बड़ा मंदिर समूह है! 
यह जाटगंगा नदी के संगम में है! 
यहां वर्तमान में 25 मंदिर हैं परंतु पहले यहां 124 छोटे बड़े मंदिर थे! 
उत्तराखंड का पांचवा धाम भी माना जाता है! 
जन शक्तियों के अनुसार इस मंदिर का निर्माण विश्वकर्मा ने कराया था और इसका जीर्णोद्धार कत्यूरी राजा शालिवाहन देव ने कराया! 
जागेश्वर मंदिर समूह का सबसे प्राचीन मंदिर महामृत्युंजय मंदिर है तथा सबसे बड़ा मंदिर दिनदिनेश्वर मंदिर है! 
यह मंदिर केदारनाथ शैली का है! 
पुराणों में इस मंदिर को हाटकेश्वर तथा भू राजस्व लेख में पट्टी पारुणेक ने कहा गया! 
जागेश्वर मंदिर में नव दुर्गा मंदिर महिषमर्दिनी मंदिर लवलीश मंदिर नटराज मंदिर का निर्माण इष्टगण ने की थी! 
जागेश्वर के मुख्य मंदिर के भीतर दीपचंद तथा त्रिमल्लचंद  की अष्ट धातु से निर्मित मूर्ति मिली है! 
शंकराचार्य ने जागेश्वर के प्रबंध हेतु दक्षिण भारत के जंगमकुमारों की नियुक्ति की! 
हाथ में दीपक युक्त थाल थामे हुए राजा दीपचंद और उसकी पत्नी की काष्ट मूर्ति मिली है
यहां प्रसिद्ध पूश्ती माता मंदिर भी है! 

वृद्ध जागेश्वर मंदिर-
यह जागेश्वर से कुछ दूरी में स्थित है यहां क्षेत्रपाल मंदिर भी स्थित है! 

झांकर सैम मंदिर-
यह स्थानीय लोक देवता है! 

द्वाराहाट-
उत्तराखंड में मंदिरों की नगरी के नाम से जाना जाता है! 
हिमालय की द्वारिका मंदिरों की नगरी मीठी मूलियो का क्षेत्र कुमाऊ का खुजराहो  के नाम से भी द्वाराहाट को जाना जाता है!
कत्यूरी राजाओं ने यहां 30 मंदिरों तथा 365 बोरियों का निर्माण कराया था इसलिए यह क्षेत्र कत्यूरी राजाओं के कलाप्रेमी तथा धर्मनिष्ट होने का प्रतीत है! 
राहुल सांकृत्यायन के अनुसार इस मंदिर का निर्माण 11 वीं से 12 वीं शताब्दी के मध्य हुआ! 
द्वाराहाट मंदिर समूह का सबसे बड़ा मंदिर गुजर देव मंदिर है जिसे ध्वज मंदिर के नाम से भी जाना जाता है! ! 
द्वाराहाट के अन्य मंदिर समूह-
महामृत्युंजय मंदिर समूह
मनियान मंदिर समूह
रतन देवल मंदिर समूह
कचहरी देवी मंदिर  समूह
केदारनाथ बद्रीनाथ मंदिर समूह
द्वाराहाट में  बद्रीनाथ मंदिर का निर्माण सुधा देव ने किया! 

रानीखेत-
कत्यूरी रानी जिया रानी इस स्थान पर कुछ समय के लिए रही थी इसलिए इसे रानीखेत कहते हैं! 
इस का प्राचीन नाम ऑकलैंड होल्स कहते है! 
इसे पर्यटकों की नगरी भी कहा जाता है! 
यह झूला देव पर्वत पर गगास नदी के तट पर स्थित है! 
गगास नदी पर भालू डैम है जिसे स्वर्ण ताल भी कहते हैं! 
नाग देवता ताल पर स्थित है! 
चिलियानौला भी रानीखेत में स्थित है! 
कुमाऊं रेजिमेंट का मुख्यालय एवं संग्रहालय भी यही स्थित है! 
अमेरिका के न्यायाधीश विलियम दोगाल्स  ने इसे विश्व का सर्वोत्तम हिल स्टेशन माना है
रानीखेत की सुंदरता से प्रभावित होकर नीदरलैंड के राजदूत (रोटरियन- एफ.ए वैरनमान) ने कहा है-"who has not visited ranikhet has not seen india"
ब्रिटिश वायसराय लॉर्ड मेयो रानीखेत अत्यधिक प्रिय था! 
रानीखेत के पर्यटक स्थल-
उपट कालिका मंदिर, हैडा खान मंदिर, पण्डु्खोली गुफा, गोल्फ कोर्स, झूला देवी मंदिर, केआरसी म्यूजियम, मनकामेश्वर विनसर महादेव मंदिर, मजखाली, चौबटिया गार्डन  शीतला खेत इत्यादि! 
 Note-झूला देवी मंदिर दुर्गा देवी तथा भगवान राम के मंदिरों के लिए प्रसिद्ध है! 
पाण्डूखोली गुफा  में पांडवों ने निवास किया था इसी के पास भी  महावतार बाबा गुफा(द्वाराहाट) बलवंत गिरी आश्रम तथा भीम की खातड़ी नामक मैदान भी है! 


चौबटिया-
फलोधान का देश(आरचर्ड कंट्री) के नाम से किसे जाना जाता है! 
1932 में यहां फल संरक्षण एवं शोध केंद्र की स्थापना की गई! 
यहां सरकारी सेब का बगान भी स्थित है! 

दूनागिरी मंदिर-
इस मंदिर की स्थापना 1183 में द्रोणांचल पर्वत में की गई! 
दूनागिरी मंदिर वैष्णवी शक्तिपीठ के रूप में भी जाना जाता है! 
प्राचीन समय में 365 सीढ़ियां होने का अनुमान था वर्तमान में यहां 510 सीढ़ियां स्थित है
द्रोण ऋषि के आश्रम स्थित होने के कारण इसे दूनागिरी नाम से जाना जाता है! 
यहां दूनागिरी झूला भी स्थित है जो नवविवाहित जोड़ों के लिए प्रसिद्ध है! 

चौखुटिया-
या राम गंगा नदी के तट पर है यह काली और वैष्णवी मंदिर हेतु प्रसिद्ध है! 
यहां से कत्यूरी राजवंश की राजधानी के अवशेष मिले हैं 
कत्यूरी राजवंश के इतिहास में इसे बैराट क्षेत्र के नाम से जाना जाता था! 
लखनपुर रामगंगा नदी के तट पर चौखुटिया से 10 किलोमीटर दूर वैराटनगर के सम्मुख है!  अंतिम कत्यूरी राजा ब्रह्मादेव यही का राजा था! 

चौखुटिया ब्लॉक में राम पादुका तीर्थ, अग्नेरी देवी(अन्यारी देवी मंदिर),बैरागढ़, लखनपुर स्थित है! 

राम पादुका तीर्थ-
असुरफाट पहाड़ी की दीवार घाटी में पश्चिमी रामगंगा नदी के तट स्थित इस तीर्थ की मान्यता हरिद्वार के समान है! 
इसी के पास इंद्रेश्वर महादेव मंदिर भी है! 


ताडीखेत-
गांधी कुटिया और गोलू देवता के मंदिर के लिए यह प्रसिद्ध है! 

शीतलाखेत-
यहां स्याही देवी का मंदिर है  किसी के पास खुटगांव है जहां गोविंद बल्लभ पंत जी का जन्म हुआ था! 

जालना- 
यह क्षेत्र में विभिन्न प्रकार के फलों के लिए प्रसिद्ध है! 

कलबिष्ट मंदिर-
अल्मोड़ा से 22 किलोमीटर दूरी पर स्थित है! 

सल्ट क्षेत्र-
5 सितंबर 1942 को भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान यहां गोलाबारी हुई और कई लोगों की मौत हुई जिस कारण गांधी जी ने इसे कुमाऊ का बारदोली कहां है! 

सोमेश्वर-
कोसी नदी के तट पर इस शिव मंदिर को 700 ईसवी में राजा सोमचंद्र ने बचाया था 
इसकी मान्यता काशी के विश्वनाथ मंदिर के समान है
यह खेती के लिए प्रसिद्ध है इसका नाम सेरा भी है! 
यहां दुग्ध कुंड दुग्ध नौला जुठा नौला स्थित है! 

कटारमल सूर्य मंदिर- 
उत्तराखंड शैली का यह मंदिर लंगड़ा ब्लाक के अंतर्गत आता है! 
उड़ीसा के सूर्य मंदिर के बाद यह एक प्रसिद्ध सूर्य मंदिर है! 
इसका निर्माण नवी से 10 वीं शताब्दी के मध्य कत्यूरी राजा कटारमल ने  कोसी नदी के तट पर किया था! 
इस मंदिर को बूटाधारी सूर्य मंदिर या बडदित्य मंदिर के नाम से भी जाना जाता है! 
इस मंदिर के कपाट वर्तमान में दिल्ली संग्रहालय में रखे गए! 
इस मंदिर के समीप गोविंद बल्लभ पंत हिमालय पर्यावरण संस्थान भी है! 
इसके पास रणचंडी मंदिर अंधेरी सुनार गांव पूर्वाभिमुखी मंदिर है! 
यह मंदिर छोटे बड़े 45 मंदिरों का समूह है यहां शिव पार्वती नरसिंह कुबेर महिषासुरमर्दिनी की भी मूर्तियां है! 

बिनसर महादेव मंदिर-




Monday, February 14, 2022

उत्तराखंड में गोरखा शासन

कुमाऊं के गोरखा प्रशासक-
गोरखा ने कुमाऊ पर 1790 में शासन स्थापित किया इस समय नेपाल का राजा रण बहादुर शाह था! की संरक्षिका राजेंद्र लक्ष्मी या इंद्र लक्ष्मी थी बाद में यह सन्यासी स्वामी निर्गुणानंद के नाम से जाना जाता है! 
कुमाऊ का प्रथम सुब्बा- कुमाऊ का पहला सुब्बा जोग मल्ल शाह था! इसने कुमाऊं में 1791 आने पर मैं पहला भूमि बंदोबस्त कराया! 
काजी नरशाही- यह एक अत्याचारी प्रशासक था जो मंगल की रात के लिए प्रसिद्ध था! 
सुब्बा बमशाह- यह अंतिम नेपाली प्रशासक था इतने नेपाल के लिए डाक चौकिया भी बनाई थी! 

गढ़वाल के गोरखा प्रशासक-
गोरखा शासन की स्थापना गढ़वाल में 1804 में हुई इस समय नेपाल का राजा विक्रमशाह था
अमर सिंह थापा- यह गढ़वाल का पहला प्रशासक था जिसे कुमाऊं और गढ़वाल दोनों की जिम्मेदारी थी इसे सर्वोच्च न्यायाधीश भी कहा जाता था नेपाल की सबसे बड़ी उपाधि काजी इसे मिली थी! 
रणजोर सिंह थापा- यह अमर सिंह थापा का पुत्र था जिसे मौला राम ने दानवीर कर्ण की उपाधि दी इसने प्रशासन की मदद के लिए सभा मंडली तथा विचारी और आचारी पदों का सृजन किया! 
हस्तीदल चौतरिया- यह शांत प्रगति का शासक था कितने किसानों को कम लगान दर पर ऋण दिया था! 
भैरो थापा- यह अत्याचारी तथा विलाषी प्रगति का शासक था जिसके कारण 1812-15 तक अमर सिंह थापा के प्रतिनिधियों ने यहां शासन किया था! 

अंग्रेजी तथा गोरखाओं के बीच युद्ध के होने के प्रमुख दो कारण थे-
बुटकल प्रांत और दूसरा अंग्रेजों की तिब्बत के साथ व्यापार करने की महत्वाकांक्षा... 
👉 अंग्रेजों की तिब्बत के साथ व्यापार की महत्वाकांक्षा-
गोरखा चाहते थे कि अंग्रेज तिब्बत के साथ व्यापार करें परंतु वह उन्हें कर दे जिसके परिणाम स्वरूप इनके बीच मतभेद उत्पन्न होने लगे.... 
मल्ले राजाओं के साथ मिलकर अंग्रेजों ने नेपाल के विरुद्ध कैप्टन कींगलाक के नेतृत्व में 2800 सेनिक  भेजे जिसमे से 800 सैनिक वापस आए! 

1774 अंग्रेजों ने व्यापारिक जानकारी के लिए जॉर्ज बोगले को भूटान भेजा  नेपाल नरेश पृथ्वी नारायण शाह ने तिब्बत व्यापारियों को पत्र लिखा और इसके साथ व्यापार करने से मना कर दिया इस तरीके से अंग्रेजों का दूसरा कदम भी असफल रहा! 
Note-  बहुत से स्त्रोतों मे दिया है कि बोगले 1794 मे भुटान गया! 
1795 में मौलवी अब्दुल कादिर को नेपाल की आंतरिक स्थिति का पता लगाने को भेजा गया! 
1802-03 में कैप्टन नाक्स नेपाल भेजा परंतु यह कदम भी असफल रहा! 
1812 मूरकाफ्ट व हेयरसी  को तिब्बत भेजा गया परंतु नेपाल प्रशासकों ने इन्हें रास्ते में ही बंदी बना लिया! 

बुटवल प्रान्त के कारण मतभेद- 
यह प्रांत लखनऊ के अंतर्गत आता था यहां का राजा पृथ्वी नारायण था जिसे गोरखा शासक विक्रमशाह और उसके प्रधानमंत्री भीमसेन थापा ने काठमांडू बुलाकर बंदी बना लिया परंतु अंग्रेजों ने लखनऊ जीता जिस कारण यह प्रांत उनका हुआ परंतु गोरखाओ का कहना था राजा उन्होंने बंदी बनाया है क्षेत्र अभी उनका होगा! 
इसके कारण अंग्रेजों और गोरखा में युद्ध हुआ और 24 अंग्रेज बुटवल थाने मे मारे गए! 

इसके बाद लॉर्ड मेयो/ हेस्टिंग्स ने 4 टुकड़िया बनाकर इन पर आक्रमण किया! 

1.मेरठ डिवीजन- इस डिवीजन का नेतृत्व रौलो गिलेस्पी (जिलेस्पी) कर रहा होता है इसकी मदद कर्नल माबी एंव  कारपेंटर कर रहे होते हैं इन्हें दुन क्षेत्र मे  आक्रमण के लिए भेजा गया था! 

लुधियाना डिवीजन-  इस डिवीजन का नेतृत्व डेविड ऑक्टरलोनी कर रहे थे इनने काली नदी से सतलज क्षेत्र पर आक्रमण किया  यह क्षेत्र अमर सिंह थापा के अंतर्गत था! 

दीनापुर डिवीजन- इस डिवीजन का नेतृत्व बैनेट मार्ले कर रहा था इसे काठमांडू में आक्रमण के लिए भेजा लेकिन नेपालियों ने इसे मार मार के भगाया इसलिए इसे एटकिंसन ने बुद्धू जनरल कहा है! 
Note- बैनेट मार्ले हरिहर गढ़ का युद्ध फरवरी 1815 में हारा था! 

बनारस डिवीजन- इस डिवीजन का नेतृत्व जॉन सिलवान वुट कर रहा था  इसे गोरखपुर में आक्रमण के लिए भेजा गया था! 

नालापानी या खलंगा का ऐतिहासिक युद्ध -
बलभद्र शाह अपने 300-400 सैनिकों के साथ नालापानी के किले में होता है वह रालो गिलेस्पी  के साथ युद्ध करने से मना कर देता है और 31 अक्टूबर 1815 को इन दोनों के बीच युद्ध होता है जिसे नालापानी या खलंगा का युद्ध कहते हैं इसमें बलभद्र साहब अपनी बहादुरी का परिचय देते हुए रालो गिलेस्पी को मार देता है! 
1 नवंबर 1814 में कर्नल मावी और कारपेंटर युद्ध की घोषणा कर देते हैं और किले मैं पानी की पाइप लाइन बंद कर देते हैं जिस कारण बलभद्र साह को किले से बाहर आना पड़ता है 30 नवंबर 1814 को इनके बीच युद्ध होता है जिसमें अंग्रेजों की जीत होती है परंतु बलभद्र साह बचकर भाग जाता है! 
नोट- बिलियन फ्रेजर नालापानी के युद्ध का आंखों देखा वर्णन किया! 
अंग्रेजों का लालमंडी किले पर आक्रमण- अंग्रेजों ने गोरखाओं को पराजित करने के लिए अल्मोड़ा के लालमंडी किले में दो ओर से आक्रमण किया! 
काशीपुर से गार्डनर,हर्षदेव जोशी तथा पीलीभीत और बरेली से कैप्टन हेयरसी ने किया! 

ब्रह्मदेव मंडी का युद्ध- यह युद्ध 14 मार्च 1815 को हुआ इस युद्ध में हस्तीदल चौतरिया कैप्टन हियरसी से पराजित होता है! 
इसके बाद 21 मार्च 1815 को  दिगालीचौड का युद्ध होता है जिसमें हस्तीदल चौतरिया हियरसी  को बंदी बना लेता है! 
Note- दिगालीचौड के युद्ध को खिलपति युद्ध भी कहा जाता है! 

गणनाथ डांडा का युद्ध- यह युद्ध 23 अप्रैल 1815 ताकुला (अल्मोड़ा) में होता है! कैप्टन निकाल्सन हस्तीदल चौतरिया को मार देता है! 

अल्मोड़ा या लालमंडी किले का युद्ध-  25 अप्रैल 1815 को  अंग्रेजों की ओर से गार्डनर और कर्नल निकलसन के नेतृत्व में बमसाह और चामू भंडारी पर युद्ध किया गया! 
बमसाह अंग्रेजों की ताकत भरी बातें समझ गया था उसने इनके साथ 27 अप्रैल 1815 को लाल मंडी की संधि (अल्मोड़ा संधि) कर ली यह संधि बमशाह व गार्डनर  के बीच हुई! 
  Note- लाल मंडी किले को खाली कर इसका नाम फोर्ड मोयरा रखा गया! 
बमशाह  संधि के विषय में अमर सिंह थापा को पत्र लिखा इस समय अमर सिंह थापा ऑक्टरलोनी के साथ युद्ध लड़ रहा था!  ऑक्टरलोनी और अमर सिंह थापा के बीच मालाउगढ की संधि 15 मई 1815 में हूंई! परंतु नेपाल नरेश ने इस संधि को नहीं माना! 

याद रखे-  बमसाह  अंग्रेजों की शक्ति को भलीभांति समझ चुका था उसने इस समस्या का समाधान करने के लिए  स्वर्गीय महाराज रण बहादुर शाह के गुरु गजराज मित्र से मिला! 

Imp- 2 दिसंबर 1815 को संगोली( चंपारण बिहार) पर  राजगुरु गजराज मिस्र, चंद्रशेखर उपाध्याय  और ब्रेड शा के मध्य संगोली की संधि हुई परंतु इसे नेपाल नरेश विक्रम शाह नहीं मानता! 

28 feb 1815 को विवश होकर ऑक्टरलोनी ने काठमांडू से कुछ दूर मकवानपुर के पास गोरखों पर आक्रमण किया और 800 गोरखा सैनिक मार दिए जिस कारण 4 मार्च 1816 को इन्होंने यह संधि मान ली! 
Note- कुछ स्त्रोत मे 28 nov 1815 संगोली संधि अंग्रेजी व अमर संधि थापा के मध्य  हुई!