Sunday, January 17, 2021
एक कदम शिक्षा की ओर❤️
उत्तराखंडी गुरुजी के नाम से प्रसिद्ध दीपक पंत सर जी और वेदांश्री लर्निंग एप के संचालक आशीष सक्सेना सर और संरक्षक अरुण गुप्ता सर ने बिंदुखत्ता का रोड क्षेत्र में निर्धन बच्चों की शिक्षा के लिए खोले गए अवंतिका कोचिंग सेंटर में उत्तराखंड पीसीएस के लिए तैयारी के स्मार्ट टिप्स दिए और बच्चों को शिक्षा की ओर प्रेरित किया l बच्चों को शिक्षा की ओर प्रेरित करने के लिए किताबें निशुल्क प्रदान की तथा जो विद्यार्थी उत्तराखंड की परीक्षा की तैयारी कर रहा है उनके लिए निशुल्क ऑनलाइन शिक्षा देने का आश्वासन दिया और साथ ही अवंतिका कोचिंग कलास में निशुल्क लाइब्रेरी के लिए अन्य मदत करने का भी आश्वासन दिया।
Saturday, January 9, 2021
एक कदम शिक्षा कि ओर✌️
रमेश चन्द्र शर्मा
बिदुखत्ता लालकुआँ क्षेत्र में विद्यार्थियों की शिक्षा के लिए लाइब्रेरी खोली जा रही है जिस के लिए लगातार लोग अपनी मदद दे रहे हैं इसी बीच प्रदेश अध्यक्ष उत्तराखंड उपनल संविदा कर्मचारी संघ रमेश चंद्र शर्मा जी द्वारा 4500+ ₹ की 27 किताबें लाइब्रेरी को गुप्त दान के रूप में दी और अपनी जानकारी गुप्त रखने को कहा गया परंतु यह कार्य समाज को प्रेरणा देने योग्य है इसलिए हमें सदैव ऐसे व्यक्तित्व से कुछ ना कुछ सीखना चाहिए l
उनकी इस पहल से कई घरों का दीपक जल सकता है सदैव ऐसे व्यक्ति प्रकाश पुंज के समान होते हैं जिनका एक उपदेश होता है रोशनी फैलानाl
धन्यवाद गुरुवार✌️
यदि कोई सहयोग करना चाहे तो संपर्क कर सकते हैं-
Ganesh Saraswati Bhatt
7248887731
Friday, January 8, 2021
हिन्दी भाषा का विकास
हिन्दी भाषा का विकास
भाषा- भाषा की उत्पत्ति भाष् धातु से हुई है जिसका अर्थ होता है कहना या बताना अर्थात अपने भावो या विचारों को प्रकट करना।
भाषा की परिभाषा- अपने मतव्य को सप्रेषित करने का माध्यम भाषा है।
भाषा के प्रकार- डॉक्टर संतोष मित्तल के अनुसार भाषा के मुख्य दो प्रकार होते हैंl
1- मौखिक भाषा
2- लिखित भाषा
मौखिक भाषा को वेदों में श्रुति साहित्य भाषा कहा गया है क्योंकि वैदिक काल में शिक्षा का ज्ञान मौखिक रूप से दिया जाता था जो पीढ़ी दर पीढ़ी एक दूसरे तक पहुंचता थाl इसे ही भाषा का मूल रूप माना गया हैl
Note- भाषा के तीन प्रकार भी होते हैं सांकेतिक भाषा मौखिक भाषा लिखित भाषा परंतु भाषा के विकास के क्रम को देखा जाए तो भाषा का विकास वैदिक युग से हुआ है जहां से मौखिक भाषा का उदय हुआ है अतः भाषा के मुख्य दो प्रकार होते हैंl
भाषा का इतिहास
👉 विश्व में 3000 भाषाएं लगभग बोली जाती है जो 13 भाषा परिवारों में वर्गीकृत हैंl
👉 सबसे प्राचीन भाषा ही परिवार भारोपीय भाषा परिवार है जिसकी जननी भाषा संस्कृत को माना जाता है इसलिए सबसे प्राचीन भाषा संस्कृत को माना जाता है जिसमें ऋग्वेद की रचना की गई है भारोपीय भाषा परिवार यूरोप से भारत तक फैला हुआ है इसमें अंग्रेजी हिंदी उर्दू आदि भाषाएं आती हैl
👉 विसेंट स्मिथ का कथन था कि संस्कृत आर्यों की धरोहर है जो कि यूराल पर्वत (मध्य एशिया) से आए थे जो अफगानिस्तान पाकिस्तान के रास्ते भारत के पंजाब अर्थात सिंध प्रांत में 1500 ईसवी पूर्व पहुंचे थे उन्होंने यहां द्रविड़ जनजाति को हराया जिसके बाद द्रवीडो जनजाति उत्तर पश्चिम भाग से भागकर दक्षिण भाग में चली गईl
भारतीय भाषा परिवार का विकास
भारतीय भाषा परिवार- जो भाषाएं जो समान गुण प्रदर्शित करती हैं उन्हें एक भाषा परिवार में रखा जाता है भारत में मुख्य 5 भाषा परिवार पाए जाते हैं।
1-भारोपीय भाषा परिवार- यह भाषा परिवार भारत के उत्तर पश्चिम क्षेत्र में बहुत अधिक फैला हुआ है इसे हिंद आर्य भाषा परिवार भी कहा जाता हैl इसमें मुख्यतः अंग्रेजी हिंदी उर्दू नेपाली कोंकणी मैथली सिंधी आदि भाषाएं आती हैl यह सबसे बड़ा भाषा परिवार हैl
2- द्रविड़ भाषा परिवार- यह भाषा परिवार दक्षिण भारत में फैला हुआl इसकी मुख्य भाषा तमिल हैl यह दूसरा सबसे बड़ा भाषा परिवार हैl इसमें मुख्य भाषा तमिल कन्नड़ मलयालम तेलुगु है तेलुगु इसकी प्रमुख भाषा है इसकी भाषाओं का विकास ब्राह्मी लिपि से हुआ है इस भाषा परिवार का विस्तार नर्मदा गोदावरी के दक्षिण भाग से कन्याकुमारी तक हुआ हैl
3- चीनी तिब्बती भाषा परिवार- इसका विकास सेवन सिस्टर राज्य अर्थात अरुणाचल प्रदेश मेघालय मणिपुर असम नागालैंड त्रिपुरा मिजोरम राज्य में हुआ है इसमें प्रमुख भाषाएं नागा मणिपुरी खासी चंबा तिब्बत बाडो इत्यादि है।
Note- मंदारीन भाषा परिवार का एक हिस्सा है। जो विश्व का सर्वाधिक बोली जाने वाली बोली हैl
4-आस्ट्रिक भाषा परिवार- इस भाषा परिवार का विकास झारखंड छत्तीसगढ़ असम पश्चिम बंगाल उड़ीसा आदि राज्यों में हुआ इसकी प्रमुख भाषा संथाली खड़िया सांवरा मुंडारी हो भाषा हैl जनसंख्या की दृष्टि से इसकी सबसे बड़ी भाषा संथाली हैl
5- अंडमानी भाषा परिवार- इसमभाषा परिवार की खोज आवेंता अब्बी ने कि यह भाषा परिवार अंडमान निकोबार दीप समूह में बोली जाती है इसमें मुख्य भाषा अंडमानी ग्रेड निकोबारी जाखा ओंगे आदि हैं।
Note- ताई कड़ाई परिवार को छठा भाषा परिवार के रूप में भी जाना जाता है जो मेघालय क्षेत्र में फैला हुआl
भारत मे भाषा वर्गीकरण
संस्कृत भाषा को हिंदी भाषा की जननी कहा जाता है भाषा के लिए हिंदी शब्द का प्रथम प्रयोग शरफुद्दीन की जफरनामा में मिलता हैl
भारत का भाषाई इतिहास लगभग 3500 वर्षों से भी अधिक पुराना है भारत में भाषा के इतिहास का वर्गीकरण प्राचीन काल से अब तक इसे तीन भागों में बांटा गया हैl
1- प्राचीन भारतीय आर्य भाषा (1500ई.पूर्व-500ई.पूर्व)
2- मध्यकालीन भारतीय आर्य भाषा (500 ईसा पूर्व से 1000ई)
3-आधुनिक भारतीय आर्य भाषा(1100ई.- अब तक)
🍁 प्राचीन आर्य भाषा परिवार- इसका कार्यकाल 1500 ईस्वी पूर्व से 500 ईसवी पूर्व तक रहा इसे मुख्य दो भागों में बांटा जाता हैl
1- वैदिक संस्कृत- इस संस्कृत में वेदों की रचना हुई है इसका काल 1500 ईसवी पूर्व से 1000 ईसवी पूर्व का हैl इस भाषा को यास्क व पाणिनी ने छान्दस नाम दिया है।
2- अलौकिक संस्कृत- संस्कृत का काल 1000 ईसवी पूर्व से 500 ईसवी पूर्व तक का हैl यह भाषा वैदिक संस्कृत के साथ बोली जाने वाली संस्कृत भाषा थीl
🍁 मध्यकालीन आर्य भाषा- इस भाषा का काल 500 ईसवी पूर्व से 1000 ईसवी तक था इसमें पाली प्राकृत अपभ्रंश और अवहट्ट भाषा आई थीl
1- पाली भाषा- इस भाषा का काल 500 ईसवी पूर्व से 100 ईसवी तक का था इस भाषा में महात्मा बुद्ध ने अपने उपदेश दिए थे जिस कारण इसे पहली देशज भाषा कहा जाता हैl
2- प्राकृत भाषा- इसका काल 100 ईसवी से 500 ईसवी तक था इस भाषा में महावीर स्वामी ने उपदेश दिए थे इसे द्वितीय देशज भाषा कहा जाता हैl
3-अपभ्रंश भाषा- इस भाषा का काल 500 ईसवी से 1000 ईसवी तक का था इसमें कई भाषा तथा उपभाषाओं का उदय हुआ जिनमें से प्रमुख भाषाएं निम्न है-
1- शौरसेनी अपभ्रंश- इसके अंतर्गत पश्चिमी हिंदी गुजराती,पहाड़ी और राजस्थानी आती है!
2- पैशाची- पंजाबी और लहंदा
3- ब्राचड.- सिन्धी
4- महाराष्ट्री- मराठी
5- मागधी- बिहारी, बंगाली, उडिया, असमिया
6- अर्द्धमागधी- पूर्वी हिन्दी
पश्चिमी हिंदी से विकसित होने वाली बोलियां- खड़ी बोली (कौरवी)ब्रजभाषा हरियाणवी बुंदेली कन्नौजी
बिहारी से विकसित होने वाली बोलियां-भोजपुरी मगही मैथिली
पूर्वी हिंदी से विकसित होने वाली बोलियां- अवधी बघेली छत्तीसगढ़ी
राजस्थानी से विकसित होने वाली बोलियां-मारवाड़ी मेवाती जयपुरी(ढुढनी) मालवी
पहाड़ी से विकसित होने वाली बोलियां- पूर्वी पहाड़ी पश्चिमी पहाड़ी मध्यवर्ती पहाड़ी
Note- अपभ्रंश से आधुनिक भारतीय भाषाओं का विकास हुआ।
स्वयंभू को अपभ्रंश का बाल्मीकि कहा जाता है।
विद्यापति ने इसे देशील बयना का है!
अवहट्ट काल- हिंदी के विकास का यह काल 500-1100 ई. तक चला यह काल अपभ्रंश व पुरानी हिन्दी के बीच का काल था! इसे संक्रमणकालीन या संक्रांति कालीन भाषा कहा है!
Note- चंद्रधर शर्मा गुलेरी ने संक्रांति काल में प्रयुक्त की जाने वाली भाषा को पुरानी हिंदी कहां है!
आधुनिक भारतीय आर्य भाषा (हिंदी) -
प्राचीन हिंदी (1100-1400ई.)
मध्यकालीन हिंदी(1400-1850ई.)
आधुनिक हिंदी(1850-अब तक)
देवनागरी लिपि का विकाश-
ब्राह्मी लिपि🏹उत्तर शैली🏹 गुप्त लिपि 🏹 सिद्ध मातृका 🏹 कुटिल लिपि 🏹 देवनागरी लिपि
❤ नागरी लिपि का सर्वप्रथम प्रयोग गुजरात के राजा जय भट्ट के शिलालेख में मिलता है!
यह अक्षरात्मक लिपि है परंतु इसका विकास वर्णनात्मक लिपि से हुआ है!
राजभाषा हिंदी-
राजभाषा हिंदी का वर्णन अनुच्छेद 343 से 351 तक किया गया है इसका वर्णन भाग 17 अनुसूची आठवीं में किया गया है!
स्वतंत्र भारत की संविधान सभा ने 14 सितंबर 1949 को हिंदी भाषा को भारत संघ की राजभाषा की मान्यता दी
अनुच्छेद 343- संघ की राजभाषा हिंदी और लिपि देवनागरी है
अनुच्छेद 344- संविधान के लागू होने के 5 वर्ष बाद राष्ट्रपति एक आयोग और संसद की समिति का गठन करेगा इसके तहत प्रथम आयोग जून 1955 में बीजी खेर की अध्यक्षता में गठित किया गया था सितंबर 1957 में अनुच्छेद 344(2)के अनुसार तत्कालीन गृह मंत्री गोविंद बल्लभ पंत की अध्यक्षता में एक संसदीय समिति का गठन किया गया!
अनुच्छेद 345- किसी राज्य की विधान मंडल विधि द्वारा राज्य के राजकीय प्रयोजनों के लिए उस राज्य में प्रयुक्त होने वाली भाषा या भाषाओं में किसी एक या अनेक को या हिंदी को अंगीकार कर सकता है!
अनुच्छेद 346- संघ में राजकीय प्रयोजनो के लिए तत्समय भाषा एक राज्य और दूसरे राज्य के बीच में तथा किसी राज्य संघ के बीच में संचार के लिए राजभाषा होगी!
अनुच्छेद 347- यदि किसी राज्य का पर्याप्त अनुपात चाहता है कि उसके द्वारा बोली जाने वाली कोई भाषा राज्य द्वारा अभी ज्ञात की जाए तो राष्ट्रपति उस भाषा को सरकारी अभिज्ञा दे सकता है समय-समय पर राष्ट्रपति ऐसी अभिज्ञा देते रहते हैं जो आठवीं अनुसूची में स्थान पाते हैं जैसे इस अनुसूची में प्रारंभ में 14 भाषाएं थी- असमिया बंगला गुजराती हिंदी कन्नड़ कश्मीरी मलयालम मराठी उड़िया पंजाबी संस्कृत तमिल तेलुगू उर्दू!
बाद में 12 वे संविधान संशोधन द्वारा 1967 में सिंधी और 71 वें संविधान संशोधन द्वारा 1995 में कोंकणी मणिपुरी नेपाली एवं 92 वे संविधान संशोधन द्वारा बोडो डोगरी मैथिली संथाली भाषा जोड़ी गई अब आठवीं अनुसूची में 22 भाषाएं हो गई है !
अनुच्छेद 348- जब तक संसद विधि द्वारा अन्य उपबंध ना करें तब तक उच्चतम न्यायालय तथा उच्च न्यायालय और प्रत्येक न्यायालय में सब कार्यवाही अंग्रेजी भाषा में होगी तथा संसद व राज्य मंडल में विधेयक नियम आदेश विनिमय आदि के लिए प्राधिकृत पाठ अंग्रेजी में होगा!
अनुच्छेद 349- संविधान कब आरंभ से 15 वर्षों की कालावधी तक अनुच्छेद 345(1) में वर्णित प्रयोजनों में से किसी के लिए प्रयोग की जाने वाली भाषा के लिए उप बंद करने वाला कोई विधायक या संशोधन संसद के किसी सदन में राष्ट्रपति के पूर्व मंजूरी के बिना पुनः स्थापित या प्रस्तावित नहीं किया जाएगा!
अनुच्छेद 350- व्यथा के निवारण के लिए कोई भी भाषा का प्रयोग जैसे भाषाई अल्पसंख्यक वर्गों के लिए प्राथमिक स्तर पर मातृभाषा में शिक्षा की सुविधा तथा अल्पसंख्यक वर्गों के लिए विशेष अधिकार की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जा सकती है!
अनुच्छेद 351- हिंदी के विकास के लिए संघ को निर्देश दिए गए हैं कि वह हिंदी भाषा का प्रसार बढ़ाए और उसका विकास करें!
विश्व हिंदी सम्मेलन-
पहला सम्मेलन-
- अवधि :10-14जनवरी 1975
- स्थान :नागपुर(महाराष्ट्र),भारत
- उद्घाटन द्वारा : इंदिरा गांधी ,प्रधान मंत्री ,भारत
- प्रतिभागी देश :30
- प्रतिनिधियों की संख्या :122
- सुवाक्य : वसुधैव कुटुम्बकम्
- 10 जनवरी को विश्व हिंदी दिवस मनाया जाता है
दूसरा सम्मेलन
- अवधि :28-30 अगस्त 1976
- स्थान :पोर्ट लुइस, मॉरीशस,
- उद्घाटन द्वारा :
- प्रतिभागी देश :17
- प्रतिनिधियों की संख्या :181
तीसरा सम्मेलन
- अवधि :28-30 अक्टूबर 1983
- स्थान :नई दिल्ली ,भारत
- उद्घाटन द्वारा :
- प्रतिभागी देश :30
- प्रतिनिधियों की संख्या :260
चौथा सम्मेलन
- अवधि :02-04 दिसंबर 1993
- स्थान :पोर्ट लुइस ,मारीसस,
- उद्घाटन द्वारा : श्री म्युक्तेश्चर चुनी
- प्रतिभागी देश :10
- प्रतिनिधियों की संख्या :203
पांचवाँ सम्मेलन
- अवधि :04-08 अप्रैल 1996
- स्थान :पोर्ट ऑफ़ स्पेन ,त्रिनिदाद और टुबैगो
- उद्घाटन द्वारा :
- प्रतिभागी देश :10
- प्रतिनिधियों की संख्या :201
छठा सम्मेलन
- अवधि :14-18 सितम्बर 1999
- स्थान :लंदन ,यू के
- उद्घाटन द्वारा :
- प्रतिभागी देश :21
- प्रतिनिधियों की संख्या :700
सातवां सम्मेलन
- अवधि :06-09 जून 2003
- स्थान : पारामारिबो, सूरीनाम
- उद्घाटन द्वारा :
- प्रतिभागी देश:16
- प्रतिनिधियों की संख्या :500
आठवां सम्मेलन
- अवधि :13-16 जुलाई 2007
- स्थान :न्यू यॉर्क ,यू एस ए
- उद्घाटन द्वारा :
- प्रतिभागी देश:20
- प्रतिनिधियों की संख्या :800
नवां सम्मेलन
- अवधि :22-24 सितम्बर 2012
- स्थान : जोहानसबर्ग ,दक्षिणी अफ्रीका
- उद्घाटन द्वारा :
- प्रतिभागी देश :30
- प्रतिनिधियों की संख्या :200
दसवां सम्मलेन
- अवधि :10-12 सितम्बर 2015
- स्थान :भोपाल, भारत
- उद्घाटन द्वारा :नरेंद्र मोदी, प्रधान मंत्री, भारत
- प्रतिभागी देश:27
- प्रतिनिधियों की संख्या :2000
ग्यारहवां सम्मलेन
- अवधि :अगस्त 2018
- स्थान :पोर्ट लुई, मॉरीशस
12 वां विश्व हिंदी सम्मेलन-
इस आयोजन 2021 में मध्य प्रदेश में जगह देवास में किया जाएगा| इसके अलावा मॉरिशस पूरी दुनिया में एक ही देश है ,जो 11 वें विश्व हिंदी सम्मेलन के आयोजन के साथ तीसरी बार विश्व हिंदी सम्मेलन की मेजबानी कर रहा है|
राजभाषा अधिनियम- राजभाषा अधिनियम 1963 में पारित किया गया था जिसमें 9 धाराएं थी संविधान के अनुसार संविधान लागू होने के 15 वर्ष के पश्चात अर्थात 26 जनवरी 1965 के बाद सभी कार्यों में केवल हिंदी का प्रयोग होगा लेकिन राजभाषा अधिनियम 1963 के प्रावधान किया गया कि 26 जून 1965 से हिंदी संघ की राजभाषा तो रहेगी ही पर उस समय से हिंदी के अतिरिक्त अंग्रेजी भी संघ के सभी सरकारी प्रयोजनों के लिए बराबर प्रयुक्त होती रहेगी
27 नवंबर 1967 को संसद में सरकार के राजभाषा संकल्प के रखे जाने के साथ-साथ 1963 के अधिनियम को संशोधित करने के लिए संसद के एक विधायक भी प्रस्तुत किया गया और अंततः इसे 8 जनवरी 1968 को अधिनियम कर दिया 1967 के संशोधन द्वारा यह व्यवस्था कर दी गई है कि जब-जब हिंदी भाषी राज्यों की विधानसभा तथा संसद सहमति ना दे तब तक हिंदी के सांसद अंग्रेजी का प्रयोग जारी रहेगा!
राजभाषा नियम 1976- राजभाषा अधिनियम की धारा 8(2) के अंतर्गत राजभाषा नियम 1976 में जारी किए गए नियम 4 के अनुसार समस्त देश को 'क' 'ख' 'ग' इन 3 क्षेत्रो मे वर्गीकृत किया गया
'क' क्षेत्र के अंतर्गत- वेयर राज्य और केंद्र शासित क्षेत्र सम्मिलित हैं जिन्होंने हिंदी को अपनी राजभाषा के रूप में स्वीकार किया है जैसे बिहार हरियाणा राजस्थान हिमाचल प्रदेश मध्य प्रदेश उत्तर प्रदेश दिल्ली तथा केंद्र शासित प्रदेश में अंडमान निकोबार दीप समूह
'ख' क्षेत्र के अंतर्गत- वे राज्य और केंद्र शासित क्षेत्र जिन्होंने केंद्र सरकार के साथ पत्र व्यवहार में हिंदी को अपनाने का निर्णय दिया है जैसे गुजरात महाराष्ट्र पंजाब तथा केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़
'ग' क्षेत्र के अंतर्गत- शेष सभी राज्य व केंद्र शासित प्रदेश को 'ग' क्षेत्र मैं रखा गया हैं जिन्होंने हिंदी में भेजे जाने वाले पत्रों को अंग्रेजी अनुवाद भी भेजा जाता है!
1976 में राजभाषा नियम बनाए गए जिसके अनुसार त्रिभाषा फार्मूला को अपनाया गया जिसमें निम्न तीन भाषाओं के प्रयोग का प्रवधान है-
1-प्रधान राजभाषा- हिंदी
2- सहायक राजभाषा- अंग्रेजी
3- प्रादेशिक भाषा
प्रमुख संस्थान-
1- फोर्ट विलियम कॉलेज की स्थापना 4 मई 1800 में कोलकाता में हुई!
2- नागरी प्रचारिणी सभा की स्थापना 16 जुलाई 1893 को काशी में हुई!
3- हिंदी साहित्य सम्मेलन 1910 में प्रयाग में हुआ!
4- हिंदी विद्यापीठ की स्थापना देवघर में 1929 में हुई!
5- राष्ट्रीय भाषा प्रचार समिति की स्थापना 1936 वर्धा में हुई!
6- संगीत नाटक एकेडमी की स्थापना 28 जनवरी 1953 में दिल्ली में हुई!
7- केंद्रीय हिंदी निदेशालय की स्थापना 1960 को नई दिल्ली में हुई!
8- केंद्रीय हिंदी संस्थान की स्थापना 1962 आगरा में हुई!
9- नागरी लिपि परिषद की स्थापना 1975 नई दिल्ली में हुई!
10- महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय की स्थापना वर्धा(महाराष्ट्र) 1997 में हुई!
कुछ महत्वपूर्ण प्रश्न-
लेखन जारी है.............
Friday, April 17, 2020
उत्तराखंड परिवहन तंत्र
सड़क परिवहन
*उत्तराखंड में कुल यातायात में सड़क यातायात का भाग 85 % से अधिक है , कुल सड़क परिवहन में से 80 प्रतिशत निजी वाहन है।
*पर्वतीय भौतिक संरचना के कारण उत्तराखंड के लगभग 40 प्रतिशत भू-भाग पर सड़कों का विकास अभी तक नहीं हो पाया है। उत्तराखण्ड के गठन के समय उत्तराखण्ड में 9 राष्ट्रीय राजमार्ग थे लेकिन फिर 5 नए राष्ट्रिय राजमार्ग घोषित करने के बाद इनकी संख्या 14 हो गयी थी। लेकिन अब 7 और राष्टीय राजमार्ग बनने से अब इनकी संख्या 21 हो गयी है।इनकी कुल लम्बाई 2954.10 किमी. है।
राज्य के गढ़वाल मंडल में सड़कों की लंबाई कुमाऊं मंडल से ज्यादा है।सबसे अधिक सड़को का विस्तार गढवाल मंडल में है।
कुल राष्ट्रीय राजमार्ग (National Highway) उनमें से 1376 किलोमीटर का रख-रखाव सामाजिक निर्माण विभाग (Social Works Department) और शेष का रखरखाव सीमा सड़क संगठन (Border Roads Organisation) करता है।
सड़कों के निर्माण व संरक्षण में सीमा सड़क संगठन (Border Roads Organisation), (D.G.B.R), लोक निर्माण विभाग (P.W.D), वन विभाग (Forest Department), जिला परिषद (District Council) एवं नगर पालिका आदि संस्थाएं योगदान करती है।
अब all weather road बनने के कारण कुछ सड़को के नाम बदले गए है।
. बद्रीनाथ धाम -राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 58 से जुड़ा है।
(अब हो जायेगा- NH 7 )NH 58 के नाम से पहचान रखने वाले ऋषिकेश-बद्रीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग को अब NH 7 के नाम से जाना जायेगा।
. केदारनाथ -राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 109 पर स्थित है।
(अब हो जायेगा- NH 107 )NH 109 के बजाय अब NH 107 के नाम से पहचाना जायेगा। रुद्रप्रयाग - गौरी कुंड
. गंगोत्री -राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 108 पर स्थित है।
(अब हो जायेगा- NH 34 ) धरासू- गंगोत्री
. यमुनोत्री -राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 94 पर स्थित है।
(अब हो जायेगा- NH 134 ) ऋषिकेश -यमनोत्री
. उत्तराखंड का सबसे बड़ा राष्ट्रीय राजमार्ग 58 है (380.80किलोमीटर)। यू.पी. बार्डर से मंगलौर रूढ़की हरिद्वार ऋषिकेश शिवपुरी देवप्रयाग श्रीनगर खंकरा रुद्रप्रयाग कर्णप्रयाग चमोली जोशीमठ बद्रीनाथ माणा तक
. सबसे छोटा राष्ट्रीय राजमार्ग 72 A है जिसकी लंबाई उत्तराखंड में लगभग 7.5 किलोमीटर है।छुटमलपुर-देहरादून तक।
. चारों धाम को 12 महीने सुरक्षित रुप से जोड़ने वाली चार धाम सड़क परियोजना इसकी लंबाई 900 किलोमीटर है वर्तमान में निर्माणाधीन है इसकी कुल लागत 12000 करोड रुपए है इस परियोजना के तहत पुल, बाईपास और टनल के द्वारा मजबूत और अंतर्राष्ट्रीय मानकों पर आधारित राजमार्ग द्वारा चार धाम यात्रा को सुरक्षित, सुगम और यात्रा अनुकूल बनाया जाएगा। जिससे उत्तराखंड में मौजूद पर्यटन की अवसरों का उचित दोहन हो पाएगा और रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।
टिहरी गढ़वाल जिले में पांच सड़कों वाला चौराहा स्थित है।
त्यूनी देहरादून से लोहाघाट चंपावत को जोड़ने वाली 659 किलोमीटर लंबी दो लाइन वाली परियोजना "हिमालयन हाईवे "वर्तमान में निर्माणाधीन है।गढ़वाल मोटर ऑनर्स यूनियन लिमिटेड की स्थापना 1941 में कोटद्वार में हुई इसका एक कार्यालय ऋषिकेश में भी है।
कुमाऊं मोटर ऑनर्स यूनियन लिमिटेड की स्थापना 1939 में काठगोदाम में हुई थी इसका कार्यालय रामनगर तक टनकपुर में है।
गढ़वाल मोटर यूजर्स कोआपरेटिव ट्रांसपोर्ट सोसाइटी लिमिटेड की स्थापना 1958 में रामनगर में हुई।
राज्य सड़क परिवहन के अधिकांश भाग पर गढ़वाल मोटर ऑनर्स यूनियन लिमिटेड, गढ़वाल मोटर यूजर्स को-ऑपरेटिव ट्रांसपोर्ट सोसायटी लिमिटेड, टिहरी गढ़वाल मोटर ओनर्स यूनियन लिमिटेड, कुमाऊ मोटर ओनर्स यूनियन लिमिटेड तथा सीमान्त सहकारी संघ आदि निजी कंपनियों का विस्तार है।
गढ़वाल मोटर आनर्स यूनियन लिमिटेड की स्थापना 1941 में कोटद्वार (पौड़ी) में हुई थी। इसका एक कार्यालय ऋषिकेश में भी है।
कुमाऊं मोटर ऑनर्स यूनियन लिमिटेड की स्थापना सन् 1939 में काठगोदाम में हुई थी। इसका कार्यालय रामनगर तथा टनकपुर में है।
रेल परिवहन
.पर्वतीय भौगोलिक संरचना के कारण प्रदेश में रेल पत्र का विस्तार बहुत कम है लगभग 345 किलोमीटर।
उत्तराखंड में 6 जिलो हरिद्वार, देहरादून, पौड़ी, उधमसिंह नगर , नैनीताल और चम्पावत में ही रेल परिवहन की सुविधा उपलब्ध है।
.राज्य में छोटे बड़े कुल 41 रेलवे स्टेशन है।
उयतराखंड के 6 जिलों में सर्वाधिक रेलपथ वाला जिला हरिद्वार तथा सबसे कम रेलपथ वाला जिला पौड़ी गढ़वाल है। पौड़ी का एक मात्र रेलवे स्टेशन कोटद्वार है।
उत्तराखंड में बिछाई गई प्रथम रेल लाइन रामपुर से किच्छा से लाल कुआं से काठगोदाम है जो 1884 से परिचालन में है।
देश की प्रथम मालगाड़ी रूडकी से PIRAN कलियर 1851 चली थी
देश में पहली बार रेल के सफर की शुरुआत 16 अप्रैल, 1853 से मानी जाती है, जब मुंबई से थाणे के बीच पटरियों पर दौडी थी। लेकिन हकीकत यह है कि भारत में रेल सबसे पहले 22 दिसंबर, 1851 को चली थी। तब रेल (मालगाड़ी) ने रुड़की से पिरान कलियर तक करीब पांच किलोमीटर की दूरी तय की थी।
हरिद्वार से कानपुर के बीच पांच सौ किलोमीटर लंबी गंग नहर बनाने वाले तत्कालीन इंजीनियर कर्नल प्रोबी टी कॉटले ने गंगनहर पर लिखी अपनी रिपोर्ट "रिपोर्ट ऑन द गंगनहर कैनाल वर्क्स" में इसका वर्णन किया है। यह रिपोर्ट आज भी रुड़की स्थित भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) की सेंट्रल लाइब्रेरी में मौजूद है।
देहरादून रेलवे स्टेशन मार्च 1900 में स्थापित किया गया। यह उत्तर रेलवे का सबसे आखिरी रेलवे स्टेशन है।
देहरादून, रायवाला, ऋषिकेश, हरिद्वार, रुड़की, काशीपुर, रामनगर, रुद्रपुर, किच्छा, लालकुआं, हल्द्वानी, काठगोदाम तथा टनकपुर आदि राज्य के प्रमुख रेलवे स्टेशन हैं, जिनसे यात्री एवं माल का परिवहन होता है और इनमे टनकपुर (चंपावत) को छोड़कर सभी बड़ी रेल लाइनों के टर्मिनल स्टेशन है। टनकपुर (चंपावत) छोटी रेल लाइन का टर्मिनल स्टेशन है।
यमुनोत्री, गंगोत्री, केदारनाथ एवं बदरीनाथ को 12 महीने चलने वाले चौड़े राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजना पर काम शुरू होने के बाद यहाँ के चारों धाम को रेललिंक से जोड़ने का परियोजना प्रस्तावित है जिसका सर्वेक्षण कार्य जारी है।
इस परियोजना के अंतर्गत रेल लाइन बिछाने के अलावा भूस्खलन एवं पर्यावरण बचाव पर भी काम किया जायेगा.
हवाई सेवा
राज्य के प्रमुख हवाई अड्डे निम्नलिखित है
1-दून (जौली ग्रान्ट ) हवाई अड्डा – देहरादून
*देहरादून जौलीग्रांट एयरपोर्ट अब पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के नाम से जाना जाएगा।
2-पंतनगर (फूलबाग) – उधम सिंह नगर
3-नैनी सैनी – पिथोरागढ़
4-गौचर – चमोली
5-चिन्यलिसैण – उत्तरकाशी
*नैनी-सैनी एयरपोर्ट को ATR-72 के विमानों के परिचालन लायक बनाया जा रहा है।
*पंतनगर को कार्गो एयरपोर्ट के रूप में विकसित किया जा रहा है।
*जॉली ग्रांट हवाई अड्डे को विस्तृत कर बोइंग और एयरबस उतारने लायक बनाया गया है।
*देहरादून-नई दिल्ली के बीच नियमित वायु सेवा प्रारंभ की गई है।
*गोचर में स्थित गोचर हवाई अड्डे को हेलीकॉप्टर सर्विस हब के रुप में विकसित किया जाना है।
*इसके अलावा राज्य में सेना के 10 हेलिपैड है।
*केदारनाथ के लिए 16 मई, 2003 से पवन हंस कंपनी (Pawan Hansh Company) द्वारा हेलीकाप्टर सेवा प्रारंभ की गई है। यह हेलीकॉप्टर अगस्त्यमुनि तथा फाटा नामक स्थान से संचालित होते है।
यह सेवा केवल केदारनाथ के पट खुले रहने तक ही उपलब्ध होती है।
*हरिद्वार में एक एविएशन अकादमी और हवाई अड्डे का निर्माण किया जा रहा है।
जलमार्ग यातायात
राज्य में प्रभावित होने वाली गंगा, यमुना तथा कुछ अन्य नदियों में छोटी-बड़ी नौकाओं द्वारा आस-पास के क्षेत्रों में आवागमन किया जाता है। लेकिन उत्तराखंड में कोई भी राष्टीय जलमार्ग नहीं है।
उत्तराखंड राज्य की प्रमुख योजनाएं और विधेयक
उत्तराखंड पंचायत राज्य संशोधन विधेयक 2019-
27 मार्च 2016 को उत्तराखंड ने पंचायती राज विधायक विधानसभा में पास किया थाl 4 अप्रैल 2016 को राज्य में पंचायती राज विधेयक लागू किया गयाl
जून 2019 में पंचायती राज विधेयक में संशोधन किया गया। इस संशोधन से दो से अधिक बच्चे वाले चुनाव नहीं लड़ सकते हैंl
पंचायती चुनाव लड़ने के लिए योग्यता 10 पास रखी गई तथा महिला व अनुसूचित जनजाति जाति पुरुष के लिए आठ पास होनी जरूरी हैl तथा पंचायत का कोई प्रतिनिधि एक साथ दो पद धारण कर सकता हैl
चारधाम राजमार्ग विकास योजना-
27 दिसंबर 2016 को प्रधानमंत्री द्वारा इस योजना का शुभारंभ किया इस योजना का उद्देश्य धाम को आलवेदर रोड से जोड़ना है।
इस योजना हेतु 12000 करोड रुपए की राशि स्वीकृत की गई है इसके तहत 889 किलोमीटर सड़कों को 10 मीटर तक चौड़ा कराना हैl
अटल आयुष्मान उत्तराखंड योजना-
प्रधानमंत्री जन आयोग योजना के तहत प्रदेश के केवल 500000 परिवारों को प्रति वर्ष ₹500000 तक की निशुल्क चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने की घोषणा की गई हैl
मुख्यमंत्री जी ने इस योजना को आगे बढ़ाते हुए अटल आयुष्मान योजना के तहत और अधिक 18 लाख परिवारों को यह सुविधा देने की घोषणा की है अब राज्य में 23 लाख परिवारों को यह सुविधा मिलेगीl
इस योजना का आरंभ 25 दिसंबर 2018 को हुआ इस योजना के लिए सरकार ने गोल्डन कार्ड दिया है वह हेल्पलाइन नंबर 104 शुरू किया गयाl
राष्ट्रीय बायो श्री योजना-
यह योजना 1 अप्रैल 2017 को आंध्र प्रदेश से शुरू हुई इस योजना के तहत देश के 107 जिलों को चयनित किया गया उसमें हरिद्वार जिला भी शामिल किया है हरिद्वार जिले में 450 लोगों को जीवन सहायता उपकरण वितरण किए जिनमें व्हीलचेयर छड़ी चश्मे प्रमुख है।
उत्तराखंड वैष्णवी सुरक्षा योजना 2019-
इस योजना के तहत सरकार हर परिवार की बेटी के जन्म होने पर नवजात शिशु को वैष्णवी किट भेजेगी वैष्णवी सुरक्षा का संचालन महिला एवं बाल विकास विभाग करेगा नवजात के मां-बाप के साथ सेल्फी फोटो भेजने पर सपरिवार को बधाई संदेश भी भेजेगीl
होमस्टे योजना 2018-
यह योजना पर्यटको को आकर्षित करने के लिए व पर्यटन क्षेत्र में रोजगार बढ़ाने के लिए सरकार द्वारा चलाई गई है इसके तहत पहाड़ों में पर्यटकों को स्वच्छ आवासी रहने के लिए की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी सरकार का 2020 तक 500 होमस्टे बनाने का लक्ष्य हैl
नंदा गौरा योजना-
2 जून 2017 को राज्य सरकार द्वारा शुरू की गई है l यह योजना गौरा देवी कन्या धन योजना व नंदा देवी योजना को मिलाकर बनाई गई है इस योजना के तहत राज्य की बीपीएल परिवार की बालिका को दो चरणों में 62 हजार रुपए दिए जाएंगेl इस योजना का संचालन महिला व बाल विकास मंत्रालय द्वारा किया जाएगाl
मुख्यमंत्री स्वास्थ्य बीमा योजना अप्रैल 2015-
1 अगस्त 2016 को इस योजना का दूसरा चरण शुरू हुआ इसके तहत 1.75 लाख रुपये तरुण निशुल्क उपचार सुविधा मिलेगी दुर्गम स्थानों में मरीजों के लिए हेली एंबुलेंस सेवा मिलेगीl
मुख्यमंत्री आंचल अमृत योजना-
7 मार्च 2019 को इस योजना का आरंभ हुआ इसके तहत 20000 आंगनबाड़ी केंद्रों में पढ़ाने वाले बच्चों को सप्ताह में 2 दिन 100 मिली दूध मिलेगाl इस पहल के तहत 2.5 लाख बच्चों को उचित पोषण मिलेगाl
उत्तराखंड किसान पेंशन योजना-
15 अगस्त 2014 को इस योजना का आरंभ हुआ इसके तहत 60 वर्ष से अधिक उम्र के किसानों को जिनके पास 2 हेक्टेयर तक की भूमि है उन्हें सरकार ₹1000 प्रतिमाह पेंशन देगी यह सुविधा स्वयं की भूमि पर खेती करने वाले किसानों को मिलेगीl
जायका परियोजना-
राज्य सरकार व जापान की कंपनी जायका के बीच 2015 में 807 करोड का अनुबंध हुआ इसके तहत वन पंचायतों के माध्यम से वनों के संरक्षण चारगाह विकास महिला रोजगार व ग्रामीण आजीविका को बढ़ाया जाएगा 2022 तक 250 वन पंचायतों को जोड़ने का लक्ष्य रखा गया
शिखर परियोजना-
इसके तहत महाविद्यालयों में रोजगार परक आईटी शिक्षा उपलब्ध कराई जाएगीll
वीर चंद्र सिंह गढ़वाली पर्यटन स्वरोजगार योजना-
1 जून 2002 को यह योजना शुरू हुई स्थानीय लोगों को पर्यटन की गतिविधियों से जोड़ने के लिए पर्यटन विभाग बैंकों के माध्यम से 4000000 रुपए तक का ऋण उपलब्ध कराएगा स्वीकृत धनराशि पर 1500000 रुपए की राजकीय सहायता प्रदान की जाती हैl
जननी सुरक्षा योजना-
इस योजना का प्रारंभ अप्रैल 2005 में हुआ इस योजना के तहत सरकारी अस्पतालों में सुरक्षित प्रसव कराने पर गर्भवती को 1430 की धनराशि दी जाएगी 2017 से यह धनराशि बढ़ाकर 6000 कर दी गई है इस योजना के तहत खुशियों की सवारी को 2015 में शामिल किया गया है जिसकी जिम्मेदारी जच्चा बच्चा को सुरक्षित घर पहुंचाने की हैl
सबला योजना-
19 नवंबर 2010 को इस योजना का आरंभ हुआ इसके तहत 11 से 18 वर्ष की किशोरियों जो कि स्कूल नहीं जाती हैं उनका विकास सुनिश्चित करना है सर्वप्रथम 4 जिले चमोली उत्तरकाशी नैनीताल हरिद्वार में सबला योजना की शुरुआत हुईl
आपातकालीन सेवा योजना 108-
यह एंबुलेंस सेवा 15 मई 2008 को शुरू की गई इसकी शुरुआत भुवन चंद्र खंडूरी जी ने की इस योजना का नाम दीनदयाल उपाध्याय के नाम पर रखा गया 17 अप्रैल 2012 को 108 की सहायता सेवा के तहत डोली सेवा का आरंभ किया गयाl
अटल खाद्य योजना-
इस योजना का शुभारंभ 11 फरवरी 2011 को किया गया बीपीएल परिवार को इसके तहत ₹2 प्रति किलोग्राम की दर से गेहूं और ₹3 प्रति किलोग्राम की दर से चावल उपलब्ध कराया जाएगाl
ई गर्वनेंस-
सरकारी काम का जो मैं शीघ्र ताला ने वह सरकार के कार्यक्रम को जनता तक पहुंचाने के लिए सूचना प्रौद्योगिकी का प्रयोग ही ई गर्वनेंस कहलाता हैl राज्य सरकार ने 2011 को e-governance वर्ष घोषित कियाl राज्य में भू अभिलेखों के लिए देवभूमि नामक सॉफ्टवेयर तैयार किया गया तथा स्वान नेटवर्क के तहत राज्य के सभी तहसीलों को जोड़ा गया सरकारी विभागों की सूचना प्राप्त करने के लिए उतरा नामक पोर्टल बनाया गयाl
ई डिस्ट्रिक्ट परियोजना-
ई गवर्नेंस के तहत यह योजना 2009 में पौड़ी जनपद से शुरू की गई इसके तहत सूचना प्रौद्योगिकी के माध्यम से सरकारी सेवाओं को जन-जन तक पहुंचाना हैl
जनाधार ई सेवा-
राज्य की तहसीलों में निवास हैसियत चरित्र व जाति प्रमाण पत्र सुगमता से प्रदान होना इस सेवा के अंतर्गत शामिल किया गया इस सेवा का पूरा नाम दीनदयाल उपाध्याय जनाधार ई सेवा हैl
पंडित दीनदयाल उपाध्याय सहकारिता किसान कल्याण योजना-
9 नवंबर 2017 से इस योजना के तहत किसानों को 2% ब्याज दर पर एक लाख का लोन दिया जाएगाl
राजीव गांधी विद्युतीकरण योजना-
2005 में उत्तराखंड सरकार व यूपीसीएल के बीच अनुबंध के तहत 2009 तक बीपीएल परिवार को विद्युत कनेक्शन दिया जाएगाl
स्वालम्बन योजना-
1966 में यह योजना प्रारंभ की गई इस योजना का लक्ष्य महिलाओं को परंपरागत और गैर परंपरागत धांधू का परीक्षण देना हैl
गंगा नदी योजना-
मैं गंगा नदी को राष्ट्रीय नदी घोषित किया गया स्पर्श गंगा अभियान 17 दिसंबर 2009 को गढ़वाल विश्वविद्यालय के छात्रों द्वारा शुरू किया गया 17 दिसंबर को गंगा स्वच्छता दिवस मनाया जाता है तथा 7 जुलाई 2016 को हरिद्वार से नमामि गंगे अभियान शुरू किया गया नमामि गंगे योजना के तहत भागीरथी अलकनंदा गंगा मंदाकिनी नदिया शामिल की गई है नमामि गंगे योजना के तहत ऋषिकेश वह देहरादून में जैव विविधता पार्क बनाए जाएंगेl
Note- समान परिश्रमिक अधिनियम 1976 के तहत सभी महिलाओं व पुरुषों को समान वेतन देना हैl
• जाल खाल योजना का संबंध जाल संचलन से हैl
• दीक्षा प्रोग्राम का उपदेश सरकारी स्कूलों में बच्चों की संख्या में वृद्धि करना हैl
• आयुष ग्राम योजना के तहत नागरिकों को बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना हैl
• कुटीर ज्योति योजना के तहत गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाले लोगों को निशुल्क विद्युत सुविधा प्रदान करने के लिए यह योजना शुरू की गई हैl
• राज्य सरकार ने 8 जुलाई 2011 को औद्योगिक नीति की घोषणा की और 26 मार्च 2003 को नई उद्योग नीति की घोषणा की राज्य सरकार ने 1 अप्रैल 2008 को औद्योगिक नीति की घोषणा की जो 2018 में लागू की गईl
• कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय योजना को 2014 में एससी एसटी ओबीसी बालिकाओं के लिए आवासीय विद्यालय की स्थापना के उद्देश्य खोला गयाl
• राष्ट्रीय आदर्श विद्यालय के तहत एससी बच्चों को अंग्रेजी शिक्षा प्रदान कराना हैl
• रहबर योजना के तहत 18 से 35 वर्ष की गरीब महिलाओं को स्वरोजगार प्रशिक्षण देना हैl
• संकेत बाल विकास कार्यक्रम के तहत 1975 से आंगनवाड़ी केंद्र को चलाया जा रहा हैl
• वंदे मातरम योजना का आरंभ 9 जनवरी 2014 को है इसके तहत गर्भवती महिलाओं को निशुल्क उपचार किया जाता हैl
• किशोरी भक्ति योजना का आरंभ 2000-01 मैं हुई जिस्म के तहत 11 से 18 वर्ष की बालिकाओं को प्रशिक्षण प्रदान करना हैl
• स्वाधार योजना 2001-02 से शुरू हुई इस योजना का लक्ष्य महिलाओं को कामकाजी व सशक्त बनाना हैl
• मोनाल परियोजना इस परियोजना के तहत 11 से 18 वर्ष की किशोरियों को मास्टर ट्रेनर के रूप में तैयार करना है।
• राज्य सरकार द्वारा 2006-07 को महिला सशक्तिकरण वर्ष घोषित किया गयाl
• प्रसूति प्रसुविधा अधिनियम 1961 के तहत महिलाओं को सर्वे तनिक अवकाश दिए जाने की घोषणा की गई दहेज निषेध अधिनियम 1961 को पारित किया गया वेश्यावृत्ति निवारण अधिनियम 1956 में पारित किया गयाl
• 9 दिसंबर 2014 को हिमालय दिवस मनाने की घोषणा हुई पहला हिमालय दिवस 9 सितंबर 2015 को मनाया गया थाथा।
• पुरोहित पेंशन योजना 2014 में 60 वर्ष से अधिक उम्र के पंडितों को ₹800 प्रति माह पेंशन दी जाएगीl
• हिमालय दर्शन योजना फरवरी 2015 को होली कब तक के माध्यम से हिमालय श्रृंखला का दर्शन कराना हैl
• हीटो पहाड़ दिवस 28 सितंबर 2015 को मनाया गयाl
• रोटी बैंक योजना मई 2017 को रुद्रपुर में शुरू की गईl
• शैलेश मटियानी पुरस्कार 2009 से शिक्षकों को प्रदान किया जाता हैl
• इंदिरा अम्मा कैंटीन योजना का आरंभ 15 अगस्त 2015 से हुआl
• पर्यावरण सुरक्षा को बढ़ाने के लिए 2015 में मेरा पहाड़ मेरा धन योजना शुरू की गईl
• तीलू रौतेली विशेष पेंशन योजना का आरंभ 1 अप्रैल 2015 को किया गया इसके तहत किस अधिकारी के लिए दी विक्यांग लोगों को पेंसिल सुविधा दी जाएगीl
• राज्य में वृद्धा अवस्था पेंशन 2014 से ₹800 प्रतिमाह मिलती हैl
• राज्य युवा नीति 5 सितंबर 2011 में घोषित की गई इसके तहत 18 से 35 वर्ष के युवाओं पर फोकस किया गयाl
• राज्य आंदोलनकारी जो विकलांग हुए उन्हें ₹10000 पेंशन तथा अन्य को ₹5000 पेंसिल दिया जाएगाl
• राठ विकास अभिकरण का गठन 2014-15 मैं किया गया जिसके तहत पौड़ी के राठ क्षेत्र का विकास हो सकेl
• निर्मल भारत अभियान 2017 से राज्य में शौचालय निर्माण योजना की शुरुआत हुईl
• आरोही परियोजना के तहत 19 मई 2002 को माइक्रो सॉफ्ट व इंटेल के सहयोग से अध्यापकों व बच्चों को कंप्यूटर प्रशिक्षण देना हैl
• शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 में पारित हुआl
• 26 अप्रैल 2001 को राज्य में पर्यटन नीति की घोषणा की गईl
• देवभूमि मुस्कान योजना 2009 में शुरू हुई जिसके तहत खनन कार्यों से जुडे लोगों के बच्चों को उत्कर्ष शिक्षा प्रदान करना हैl
• स्कूल चलो अभियान 1 जुलाई 2001 से शुरू किया गया जिसके तहत 6 से 16 वर्ष के बच्चों को स्कूल में 100% नामांकन कराना हैl
• 2000-01 मैं राजीव को राष्ट्रीय पर्यटन पुरस्कार तथा बेस्ट टूरिज्म हेतु 2004 में राज्य को एक्सप्रेस गैलीलियो पुरस्कार मिलाl
• देहरादून में विज्ञान धाम अथवा शाइन सिटी की स्थापना की गईl
• उत्तराखंड अंतरिक्ष उपयोग केंद्र की स्थापना 21 सितंबर 2005 को स्वायत संस्थान के रूप में की गईl
• उत्तराखंड विकास एवं प्रौद्योगिकी परिषद की स्थापना 21 फरवरी 2005 को की गईl
• उत्तराखंड में विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान केंद्र की स्थापना 2 फरवरी 2006 को की गईl
• सोलर सिटी का विकास देहरादून में किया जा रहा हैl
• नैनीताल के पांडवाडानगर में जैव प्रौद्योगिकी संस्थान की स्थापना की गईl
• राज्य सरकार पर्यावरण के क्षेत्र में गढरत्न सम्मान व सीसीआई ग्रीन अवार्ड प्रदान करती हैl
• पर्यावरण सुरक्षा के कार्यों के लिए राज्य सरकार पितांबर अंतरराष्ट्रीय पर्यावरण फैलोशिप देती हैl
• हिमालय पर्यावरण शिक्षा संस्थान टिहरी व उत्तरकाशी में 1995 से पानी व पेड़ से को संरक्षण व समृद्ध करने के लिए कार्य कर रहा हैl
• पर्यावरण मित्र योजना कब आरंभ 2006 को श्रीनगर से हरक सिंह रावत द्वारा किया गयाl• देहरादून में बने राष्ट्रपति आशियाना एनेक्सी का उद्घाटन 10 जुलाई 2017 को किया गया
Thursday, April 16, 2020
ओलंपिक खेल
⭐ प्राचीन ओलंपिक खेल यूनान के ओलंपिया शहर से 1776 ईसा पूर्व में प्रारंभ हुआ कालांतर में इन खेलों का आयोजन बंद कर दिया गयाl
⭐आधुनिक ओलंपिक खेल प्रतियोगिता का आरंभ 1896 ईसवी को फ्रांस के बैरोन पियरे डी कोबार्टिग के प्रयासों से यूनान के एथेंन शहर में हुआ तब से प्रत्येक 4 वर्ष के अंतराल पर इनका आयोजन किया जाता हैl
⭐अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति की स्थापना 1894 ईसवी को सखोन नामक स्थान पर हुई जिसका मुख्यालय लुसोने में है।
⭐अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति के प्रथम अध्यक्ष डिमिट्रियास विकेलास थे वर्तमान में ओलंपिक समिति के अध्यक्ष थामस बाख है।
⭐भारतीय ओलंपिक परिषद की स्थापना 1924 ईस्वी में की गई जिसके प्रथम अध्यक्ष सर जेजे टाटा थे ll
⭐अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति की पहली महिला भारतीय सदस्य नीता अंबानी है जिन्हें 129सत्र 4 अगस्त 2016 को 52 वर्ष की आयु में सदस्य चुना गया।
⭐बैरोन पियरे डि कोबार्टिग के सुझाव पर 1913 ईस्वी में ओलंपिक ध्वज को का सर्जन किया गया इस ध्वज को सर्वप्रथम 1920 ईस्वी में एंटवर्प ओलंपिक में फहराया गयाl ध्वज की पृष्ठभूमि सफेद है इस पर ओलंपिक प्रतीक के रूप में पांच रंगीन चक्र एक दूसरे से मिले हुए दर्शाए गए हैं जो विश्व के 5 महाद्वीप को दर्शाते हैं नीला चक्र यूरोप पीला चक्र एशिया काला चक्र परी का हरा चक्र ऑस्ट्रेलिया लाल चक्र उत्तर एवं दक्षिण अमेरिका का प्रतिनिधित्व करते हैंl
⭐ओलंपिक मशाल जलाने की शुरुआत 1928 ईस्वी में एम्एम्सटर्डम ओलंपिक से हुई 1936 में बर्लिन ओलंपिक खेलों में मसाज के वर्तमान स्वरूप को अपनाया गयाl
⭐ओलंपिक खेलों में शपथ ग्रहण करने पर परंपरा 1920 ईस्वी के एंडवर्प ओलंपिक से तथा शुभारंभ की परंपरा वर्ष 1968 में मैक्सिको सिटी ओलंपिक से बाहर हुईl
⭐1972 ईस्वी के म्यूनिख ओलंपिक में फिलिस्तीनी आतंकवादी हमले में 11 इसराइली एथलीड मारेगा।
⭐किसी एक ओलंपिक में सर्वाधिक स्वर्ण जीतने वाले पुरुष खिलाड़ियों के तैराक माइकल फेल्प्स है। इन्हें गोल्डन शार्क के नाम से भी जाना जाता है इन्होंने 2008 में बीजिंग ओलंपिक में तैराकी की विभिन्न प्रतियोगिता में 8 स्वर्ण पदक जीते थेl
⭐किसी ओलंपिक में सर्वाधिक 55 स्वर्ण पदक जीतने का विश्व रिकॉर्ड रूस का है रूस ने 55 स्वर्ण पदक 1988 में सियोल ओलंपिक में जीते थेl
⭐भारत की ओर से ओलंपिक खेलों में भाग लेने वाला प्रथम खिलाड़ी एक आंगन इंडियन नॉर्मल प्रिजार्ड थे। ⭐जिन्होंने 1900 ईसवी में द्वितीय ओलंपिक में भाग लियाl और दो रजत पदक जीते थे।
⭐भारत में सर्वप्रथम 1920 के ओलंपिक में अपने खिलाड़ियों का दल भेजा इस दल में दो पहलवान दो अथिलीट एक प्रबंधक थे इन चार खिलाड़ियों में फदीपा डरेपा छागुले ने मैराथन दौड़ में 19 स्थान प्राप्त किया इस प्रकार वह भारत के प्रथम मैराथन धावक हुएl
⭐ओलंपिक में एथलेटिक्स प्रतियोगिता के फाइनल में पहुंचने वाले प्रथम भारतीय मिल्खा सिंह थे जिन्होंने 1960 में रोम ओलंपिक के 400 मीटर दौड़ में चौथा स्थान प्राप्त किया थाl ओलंपिक खेलों में सर्वाधिक स्वर्ण पदक जीतने वाली महिला खिलाड़ी का नाम लरीना लाव्यनीना है। जिन्होंने जिम कास्टिक वर्ग में सर्वाधिक 9 स्वर्ण पदक सहित कुल 18 पदक जीते हैंl
⭐ओलंपिक खेलों में भाग लेने वाली भारत की प्रथम महिला खिलाड़ी मेरी लीलाराम है।
⭐लंदन पहला शहर है जिसमें तीन ओलंपिक खेल 1908 1948 2012 की मेजबानी की है l
⭐31 में ग्रीष्मकालीन ओलंपिक खेलों का शुभारंभ ब्राजील के शहर रियो डी जेनेरो में अगस्त 2016 को हुआ इस समारोह का मुख्य आकर्षण केंद्र ग्लोबल वार्मिंग का संदेश रहाl उद्घाटन समारोह में भारतीय दल के ध्वजवाहक अभिनव बिंद्रा थाl दक्षिण सूडान और कोसोवो ने पहली बार 2016 के रियो ओलंपिक में भाग लिया रियो ओलंपिक में दो नए खेल रिग्बी-7 और गोल्फ को शामिल किया गयाll
⭐32 वें ओलंपिक का आयोजन माराकाना स्टेडियम टोक्यो में 2020 में किया जाएगाl
⭐ओलंपिक पदक जीतने वाला प्रथम भारतीय मुक्केबाज मैरी काम थी ओलंपिक पदक जीतने वाली प्रथम महिला बैडमिंटन खिलाड़ी साइना नेहवाल थीl
⭐सुशील कुमार भारत के प्रथम खिलाड़ी हुए जिन्होंने 2 बार लगातार ओलंपिक पद प्राप्त किए जिन्होंने 2008 के बीजिंग ओलंपिक में कांस्य पदक 2012 के लंदन ओलंपिक में रजत पदक प्राप्त किया
⭐बीजिंग ओलंपिक 2008 में अभिनव बिंद्रा द्वारा 10 मीटर एयर राइफल में जीता गया स्वर्ण पदक किसी वैव्यक्तिक प्रतियोगिता में भारत का पहला ओलंपिक स्वर्ण पदक है।
⭐2024 का ओलंपिक खेल पेरिस में प्रस्तावित हुआ हैl
Saturday, March 21, 2020
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